राजाजी टाइगर रिजर्व में बनेगी ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’, अग्निवीरों को मिलेगी प्राथमिकता

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Dehradun: राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए कॉर्बेट नेशनल पार्क की तर्ज पर ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’ बनाई जाएगी। राज्य वन्यजीव बोर्ड की 23वीं बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। इस विशेष बल में सेना से लौटने वाले अग्निवीरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने और साहसी नागरिकों को राज्य स्तर पर सम्मानित करने के निर्देश दिए। साथ ही पीड़ितों को समयबद्ध मुआवजा देने की बात भी कही।

वन्यजीव तस्करी पर लगेगा अंकुश, कॉल डिटेल का मिलेगा अधिकार

बैठक में वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वन विभाग को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) प्राप्त करने का अधिकार देने का प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में वन विभाग को सीडीआर और लोकेशन संबंधी जानकारियों के लिए पूरी तरह से पुलिस प्रशासन पर निर्भर रहना पड़ता है।

वर्तमान में कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स तैनात है, जहां शिकार की घटनाओं में कमी आई है। इसी मॉडल को अब राजाजी टाइगर रिजर्व में लागू किया जा रहा है, जहां 62 बाघ मौजूद हैं। इस व्यवस्था से क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा काफी मजबूत हो जाएगी।

कुंभ 2027 और एआई आधारित निगरानी पर विशेष जोर

कुंभ-2027 के दौरान हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए छह हाथियों की रेडियो कॉलरिंग का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा राजाजी क्षेत्र में एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने और संवेदनशील इलाकों में भालू व गुलदार के संघर्ष पर शोध कराने का भी फैसला लिया गया है।

बैठक में उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में सीमावर्ती सड़कों के चौड़ीकरण, गैस पाइपलाइन बिछाने और मोबाइल टावर लगाने से जुड़े विकास प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए 10 जिलों में ट्रीटमेंट और रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करने का 16 करोड़ का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

Desh Raj
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