London News: ब्रिटेन के हिंदू संगठन ‘इनसाइट यूके’ ने ब्रिटिश संसद में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में हिंदू और ईसाई समुदायों के लंबे उत्पीड़न, संपत्तियों पर कब्जे, मंदिरों पर हमलों और हर साल करीब 1,000 लड़कियों के जबरन धर्मांतरण पर गहरी चिंता जताई गई है।
ब्रिटिश हिंदू संगठन ‘इनसाइट यूके’ (INSIGHT UK) की एक नई रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय की बदहाल स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। 28 अक्टूबर को ब्रिटिश संसद के ‘ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप फॉर ब्रिटिश हिंदूज’ के समक्ष पेश की गई इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान में हिंदू लंबे समय से संस्थागत भेदभाव, हिंसा और धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में जबरन धर्मांतरण, संपत्तियों पर अवैध कब्जे और धार्मिक स्थलों पर हमलों के पुख्ता संदर्भ दिए गए हैं।
1947 के बाद से तेजी से घटी हिंदुओं की आबादी
रिपोर्ट में पेश किए गए ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, 1941 की अविभाजित भारत की जनगणना के समय वर्तमान पाकिस्तान वाले भूभाग में हिंदू आबादी 14 प्रतिशत से अधिक थी। इसके विपरीत, मौजूदा समय में पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह गई है। संगठन का कहना है कि 1947 में देश बनने के बाद से ही अल्पसंख्यकों को लगातार भेदभाव, जान-माल के खतरे और धार्मिक स्थलों के विनाश का सामना करना पड़ा है। इस रिपोर्ट में ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ-साथ पीड़ितों के बयान और मौजूदा जमीनी हालात के दस्तावेज भी शामिल किए गए हैं।
हर साल 1,000 लड़कियों के अपहरण और जबरन निकाह का दावा
रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पाकिस्तान में हर साल हिंदू और ईसाई समुदाय की लगभग 1,000 नाबालिग लड़कियों और युवतियों का अपहरण किया जाता है। इसके बाद उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर अपहरणकर्ताओं से निकाह करा दिया जाता है। इन घटनाओं का सबसे प्रतिकूल प्रभाव अल्पसंख्यक परिवारों और उनकी युवा महिलाओं पर पड़ रहा है। संगठन ने जोर देकर कहा है कि धार्मिक स्वतंत्रता एक बुनियादी मानवाधिकार है और महिलाओं को अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले खुद लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।
इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर निर्माण का गतिरोध भी रेखांकित
रिपोर्ट में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहले हिंदू मंदिर निर्माण के गतिरोध का विशेष उल्लेख किया गया है। आधिकारिक मंजूरी मिलने के बावजूद वर्ष 2020 में कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के कड़े विरोध के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपने बुनियादी धार्मिक अधिकारों का पालन करने में किस हद तक सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ब्रिटिश सरकार के समक्ष रखी गईं पांच प्रमुख मांगें
इनसाइट यूके ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार के समक्ष पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं। संगठन ने मांग की है कि ब्रिटेन पाकिस्तान के साथ होने वाली प्रत्येक द्विपक्षीय बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा अनिवार्य रूप से उठाए और धार्मिक स्थलों पर हमलों के मामलों की त्वरित अदालती सुनवाई सुनिश्चित कराए। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश वित्तीय सहायता को मानवाधिकारों में सुधार से जोड़ने तथा अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए कार्यरत संगठनों को अलग से आर्थिक मदद देने का आग्रह किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि इस्लामाबाद स्थित ब्रिटिश उच्चायोग में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए दो पद आरक्षित किए जाएं, हर छह महीने में अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर समीक्षा रिपोर्ट जारी हो और जबरन धर्मांतरण की शिकार पीड़ित युवतियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थलों (शेल्टर होम्स) की व्यवस्था की जाए।