वैध प्रवेश होने पर यूएपीए के तहत विदेशी नागरिकों को जमानत पर कोई पूर्ण रोक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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New Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी विदेशी नागरिक का भारत में प्रवेश वैध है, तो ‘गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (यूएपीए) के तहत उसे जमानत देने पर कोई पूर्ण रोक नहीं है। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अपील खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत किसी विदेशी नागरिक को जमानत देने पर कोई रोक नहीं है, बशर्ते भारत में उसका प्रवेश कानूनी और अधिकृत हो। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के 12 दिसंबर 2023 के आदेश को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। मद्रास हाईकोर्ट ने एक आतंकी मामले में श्रीलंकाई नागरिक की जमानत रद्द करने वाले विशेष ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलट दिया था।

पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यूएपीए की धारा 43डी (7) के तहत विदेशी नागरिकों को जमानत देने के कड़े नियम होने के बावजूद, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी का भारत में प्रवेश अवैध था। अदालत ने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे प्रथमदृष्टया यह साबित हो सके कि आरोपी अनधिकृत तरीके से देश में दाखिल हुआ था।

क्या हैं आरोपी पर लगे आरोप?

दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी मोहम्मद रिफास उर्फ मोहम्मद रिगबास मूल रूप से वैध वीजा के माध्यम से भारत आया था। वीजा की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद उसका देश में प्रवास अवैध हुआ, जिसके चलते विदेशी अधिनियम के तहत अलग से आवश्यक कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है। रिफास पर विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच नफरत फैलाने और सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।

एनआईए की अपील पर अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने एनआईए की चुनौती को खारिज करते हुए कहा, “हमारा मत है कि वर्तमान अपील में कोई दम नहीं है। अतः इसे खारिज किया जाता है। इसके साथ ही आपराधिक अपील में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा 12 दिसंबर, 2023 को पारित आदेश को बरकरार रखा जाता है।”

इस फैसले से साफ हुआ है कि वीजा अवधि समाप्त होने के मामलों को सीधे तौर पर अवैध या अनधिकृत घुसपैठ के समान नहीं माना जा सकता, यदि प्रारंभिक प्रवेश पूरी तरह कानूनी दस्तावेजों के साथ हुआ हो।

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