Kullu News: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के छठे दिन ढालपुर के ऐतिहासिक मैदान में देव आस्था, राजसी वैभव और सदियों पुरानी परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। भगवान नरसिंह की भव्य जलेब यात्रा शाही अंदाज में निकाली गई, जिसमें देश-दुनिया से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस ऐतिहासिक आयोजन के समापन समारोह की अध्यक्षता करेंगे।
भगवान नरसिंह की भव्य जलेब और देवमय हुआ ढालपुर
ढोल-नगाड़ों, करनाल और शहनाई की गूंज के बीच पूरा ढालपुर देवमय हो उठा। सजे-धजे देव रथों के साथ कदमताल करते देवलुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। महाराजा और सैंज घाटी के विभिन्न देवी-देवताओं ने इस भव्य जलेब यात्रा में भाग लिया। जलेब के अलौकिक दर्शनों के लिए मैदान के चारों ओर भारी भीड़ जुटी रही, जहां श्रद्धालुओं ने इस पारंपरिक दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया।
यात्रा में शामिल देवी-देवताओं के रथ पारंपरिक आभूषणों और आकर्षक सजावट से सुसज्जित थे। कुल्लू दशहरा केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि यहां की लोक आस्थाओं और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है। भगवान नरसिंह की जलेब इसी प्राचीन विरासत को आगे बढ़ाती है।
लंका दहन के साथ आज संपन्न होगा महाकुंभ
विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव मंगलवार को लंका दहन की प्राचीन परंपरा के साथ संपन्न होगा। देवभूमि कुल्लू के आराध्य देवी-देवता लंका पर चढ़ाई करेंगे और भगवान रघुनाथ जी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान माता हिडिंबा की अगवाई में लंका दहन की सभी रस्में ब्यास नदी के किनारे लंका वेकर में निभाई जाएंगी।
खास बात यह है कि कुल्लू दशहरा एकमात्र ऐसा उत्सव है जहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि प्राचीन परंपरा के अनुसार लंका दहन किया जाता है। इस बार के देव समागम में मनाली, निरमंड, आनी, बंजार, सैंज, गड़सा, मणिकर्ण, काईस, ऊझी, लगवैली और महाराजा क्षेत्र के 300 से अधिक देवी-देवताओं ने भाग लिया। इतिहास में यह पहला अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में देवी-देवता दशहरा उत्सव में विराजमान हुए हैं। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सभी देवी-देवता अपने-अपने देवालयों को लौटेंगे।