Unnao News: दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता के चाचा की उन्नाव न्यायालय में पेशी कराने में सरकार पिछले छह वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान आवाज न सुनाई देने जैसे तर्कों के चलते उसे हर महीने दो बार भारी पुलिस सुरक्षा घेरे में दिल्ली से उन्नाव लाया जा रहा है।
पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सेंगर पर जानलेवा हमले के मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में 10 साल की सजा काट रहे उन्नाव के चर्चित माखी दुष्कर्म कांड की पीड़िता के चाचा की न्यायालय में पेशी सरकारी खजाने पर भारी पड़ रही है। उन्नाव की अदालत में चल रहे चार अन्य मुकदमों की सुनवाई के लिए उसे दिल्ली से उन्नाव लाने-ले जाने में पिछले छह वर्षों के दौरान एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च हो चुकी है।
उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि अभियुक्त संवेदनशील हो और जेल से अदालत की दूरी अधिक हो, तो सुरक्षा व संसाधनों की बचत के लिए पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से कराई जाए। इसके बावजूद तकनीकी अड़चनों और आरोपित की दलीलों के चलते नियमित भौतिक पेशी करानी पड़ रही है।
भारी सुरक्षा घेरा और हर महीने दो बार आवागमन
आरोपित को अदालत में प्रस्तुत करने के लिए महीने में दो बार दिल्ली से उन्नाव लाया जाता है। इस सुरक्षा घेरे में एक क्षेत्राधिकारी (सीओ) तथा 30 से 35 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। इसके अतिरिक्त जिस-जिस जिले के रूट से यह काफिला गुजरता है, वहां की स्थानीय पुलिस भी मार्ग में सुरक्षा उपलब्ध कराती है।
वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र नाथ शुक्ल के अनुसार, पहले लगभग छह से सात बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी कराई गई थी। हालांकि, आरोपित द्वारा आवाज स्पष्ट न आने का तर्क देने और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की मांग के कारण उसे कड़े पहरे में लाना पड़ता है। अधिवक्ता नियुक्त होने के बाद भी वह अदालत में स्वयं जिरह करता है।
उन्नाव की अदालत में विचाराधीन हैं ये चार मामले
माखी दुष्कर्म कांड में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर ने वर्ष 2000 में पीड़िता के चाचा पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया था, जिसमें वर्ष 2002 में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया था। 20 नवंबर 2018 को गिरफ्तारी के बाद वर्ष 2019 में उन्नाव अदालत ने उसे हत्या के प्रयास में 10 वर्ष की सजा सुनाई। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उसने तिहाड़ जेल ट्रांसफर का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया था।
इसके अतिरिक्त आरोपित पर उन्नाव में चार अन्य मुकदमे विचाराधीन हैं:
- दस्तावेजों में हेरफेर: न्यायालय के तत्कालीन अभिलेखागार प्रभारी गणेश तिवारी की शिकायत पर सदर कोतवाली में दर्ज धोखाधड़ी का मामला, जिसमें गैंगस्टर पत्रावली में सफेदा लगाकर नाम बदलने का आरोप है।
- रंगदारी व मानहानि: सदर क्षेत्र के राजकुमार सिंह द्वारा 1 नवंबर 2017 को दर्ज कराया गया ब्लैकमेलिंग, मानहानि, आईटी एक्ट और धमकी का मामला।
- गवाह की मौत पर अफवाह: सीबीआई के गवाह यूनुस खान की स्वाभाविक मौत को हत्या बताकर कब्र खुदवाने और जांच में आरोप झूठे निकलने पर 6 सितंबर 2018 को माखी पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमा।
- धोखाधड़ी व धमकी: यूनुस के भाई जानमुहम्मद द्वारा 7 अक्टूबर 2018 को दर्ज कराया गया आपराधिक मामला।