National News: भारत में मोटरसाइकिल का उपयोग रोजाना के काम, ऑफिस जाने और लंबी यात्राओं के लिए बड़े पैमाने पर होता है। आपने गौर किया होगा कि ज्यादातर आधुनिक बाइक्स में पीछे बैठने वाले यानी पिलियन की सीट राइडर से थोड़ी ऊंची होती है। इसके पीछे इंजीनियरिंग, डिजाइन और संतुलन से जुड़े कई कारण हैं।
बाइक की सीट का ढांचा तैयार करते समय राइडर और पीछे बैठने वाले की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखा जाता है। सीट का यह विशेष आकार बाइक के वजन को संतुलित रखने में मदद करता है। दो लोगों के बैठने पर वाहन की स्थिरता बनी रहे, इसलिए फ्रेम और चेसिस के अनुरूप सीट बनाई जाती है।
सफर के दौरान बेहतर विजिबिलिटी और वजन का संतुलन
पिलियन सीट ऊंची होने से पीछे बैठे व्यक्ति को आगे का रास्ता साफ दिखाई देता है, जिससे अचानक ब्रेक लगने पर वह मानसिक रूप से तैयार रहता है। राइडर आगे झुककर हैंडल संभालता है, जबकि पीछे बैठने वाले को सही बॉडी पोस्चर देने के लिए सीट को थोड़ा ऊपर उठाया जाता है ताकि राइडिंग का अनुभव आरामदायक बने।
हालांकि हर बाइक में सीटों का यह अंतर एक जैसा नहीं होता। क्रूजर या सामान्य कम्यूटर बाइक्स में दोनों सीटें लगभग बराबर होती हैं, जबकि स्पोर्ट्स बाइक्स में यह अंतर अधिक दिखता है। सस्पेंशन और सड़क के झटकों को झेलने के लिए रियर सीट की ऊंचाई और फोम की मोटाई को उसी अनुसार ढाला जाता है।