Shimla News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बहाल करने और विश्वविद्यालय अधिनियम में किए गए संशोधनों के विरोध में गैर शिक्षक कर्मचारियों का आंदोलन लगातार जारी है। इसी कड़ी में शनिवार को लंच के समय प्रशासनिक भवन के बाहर गेट मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमें कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया।
विश्वविद्यालय स्वायत्तता बचाओ संघर्ष मंच के अध्यक्ष राजेश ठाकुर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कर्मचारियों ने संशोधनों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की निर्णय लेने की शक्तियों को पूरी तरह बरकरार रखने की पुरजोर मांग उठाई। गेट मीटिंग के दौरान नरेश कुमार शर्मा, कुलदीप ठाकुर, देवेंद्र कुमार और सुरेश कुमार वर्मा ने भी कर्मचारियों को संबोधित किया।
कार्यकारिणी परिषद और वित्त समिति पर विशेष जोर
वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णायक संस्था कार्यकारिणी परिषद की श्रेष्ठता और प्राथमिकता हमेशा बरकरार रहनी चाहिए। उन्होंने मांग उठाई कि विश्वविद्यालय की वित्त समिति की अध्यक्षता केवल कुलपति ही करें। साथ ही वित्त समिति की सभी सिफारिशों का अनुमोदन सीधे कार्यकारिणी परिषद के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
इसके अलावा वक्ताओं ने गैर शिक्षक कर्मचारियों के विभिन्न संवर्गों की शुरुआती श्रेणियों में रिक्त पड़े पदों को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया जाए, ताकि सकारात्मक चर्चा के जरिए स्थायी समाधान निकाला जा सके।
आंदोलन के अगले चरणों की रूपरेखा तैयार
संघर्ष मंच ने अपने आंदोलन को और अधिक तेज करने का बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत आगामी सत्ताईस अक्टूबर से सभी कर्मचारी काले बिल्ले बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में हस्ताक्षर अभियान को भी तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
मंच की आगामी बैठक में आंदोलन के अगले चरणों की पूरी रणनीति तय की जाएगी। कर्मचारियों ने एक बार फिर विश्वविद्यालय की खोई हुई स्वायत्तता को तुरंत बहाल करने की अपनी मांग दोहराई है। कर्मचारियों का कहना है कि इस गंभीर मुद्दे पर सरकार और प्रशासन को जल्द से जल्द सकारात्मक पहल करनी चाहिए।