New Delhi News: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 33वें स्थापना दिवस पर अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश के प्रधान न्यायाधीश को हर मिनट अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है। यह जरूरी नहीं कि परीक्षा लेने वाले हमेशा सच्चे हों। यह पद देश का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पद बन चुका है।
प्रधान न्यायाधीश का पद बेहद संवेदनशील और शक्तिशाली
विज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। एनएचआरसी अध्यक्ष ने सीजेआई की मौजूदगी में कहा कि यह पद सबसे सक्रिय और शक्तिशाली होने के साथ सबसे नाजुक भी है। व्यस्त समय में कार्यक्रम में आने के लिए उन्होंने प्रधान न्यायाधीश का आभार भी व्यक्त किया।
आयोग के 33 वर्षों के सफर की सराहना
न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम की इन बातों को मंच पर मौजूद प्रधान न्यायाधीश और दर्शकों ने हल्के-फुल्के अंदाज में लिया। उन्होंने याद दिलाया कि 12 अक्टूबर 1993 को आयोग की स्थापना हुई थी। अपने 33 वर्षों के कार्यकाल में इस संस्था ने देश में मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें मजबूत करने में बेहद सराहनीय काम किया है।
