Delhi News: दिल्ली में सीजेपी प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। अदालत ने शहर से तुरंत बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मेट्रो ट्रेनें अपने तय समय पर चलनी चाहिए। लोगों की आवाजाही को भी जल्द सामान्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
दस अक्टूबर को पुलिस कार्रवाई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर लगी रोक के खिलाफ कई याचिकाएं दायर हुई थीं। इनमें आरोप लगाया गया कि मेट्रो और रेलवे सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। अदालत में बताया गया कि शहर में करीब सात हजार लोगों को हिरासत में लिया गया है। इससे आवाजाही काफी मुश्किल हो गई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में इन सभी आरोपों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली मेट्रो सामान्य रूप से चल रही थी। शहर के 303 में से सिर्फ 45 मेट्रो स्टेशनों के कुछ एंट्री और एग्जिट गेट पर पाबंदी थी। मेहता के अनुसार शनिवार रात तक सभी गेट खोल दिए गए थे।
तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि शनिवार रात दस बजे तक इंटरनेट सेवा भी बहाल कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र सरकार को सभी याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी वकील को उसका काम करने से रोका नहीं जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पास नौ अक्टूबर के आदेश के उल्लंघन की शिकायतें आई हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कई मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशन पूरी तरह बंद रहे। पुलिस की ट्रैफिक एडवाइजरी की वजह से लोगों को भारी परेशानी हुई। शहर में इंटरनेट बंद होने से कर्फ्यू जैसे हालात पैदा हो गए थे।
सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सात हजार लोगों की हिरासत का मामला बेहद गंभीर है। जीटीबी नगर और विश्वविद्यालय जैसे मेट्रो स्टेशनों को पूरी तरह बंद रखा गया था। अन्य वकीलों ने भी इस मामले में अपनी दलीलें पेश कीं।
सुनवाई के दौरान यह दलील भी दी गई कि मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। प्रशासन जरूरत पड़ने पर कानूनी पाबंदियां लगा सकता है। अदालत का मुख्य उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ आम जनता की परेशानी को कम करना है। अब केंद्र के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।
