Shimla News: हिमाचल प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह की कथित अनदेखी को लेकर अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे के दौरान वीरभद्र सिंह की फोटो न लगाने और भाषणों में उनका जिक्र न होने पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने गहरी नाराजगी जताई है।
रोहड़ू दौरे पर वीरभद्र सिंह को पोस्टरों और भाषणों में जगह न मिलने पर प्रतिभा सिंह ने कहा कि उनके निधन को अभी चार साल भी नहीं हुए हैं और उन्हें भुलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। हालांकि, इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।
विवाद बढ़ता देख प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने मामले पर सफाई जारी की है। उन्होंने कहा कि यदि पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं थी तो ऐसा नहीं होना चाहिए था। यह किसी मानवीय भूल का परिणाम हो सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में पार्टी आयोजनों में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी।
रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से वीरभद्र सिंह का काफी गहरा नाता रहा है। वह 1990 से 2007 तक लगातार पांच बार यहां से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बावजूद दो अक्तूबर को मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान न तो पोस्टरों में उनकी तस्वीर लगाई गई और न ही पार्टी के मंच से उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया।
यह पहला मौका नहीं है जब वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर विवाद खड़ा हुआ है। दिसंबर 2025 में मंडी में आयोजित तीन साल के कार्यकाल की संकल्प रैली के दौरान भी पोस्टरों से उनकी तस्वीर नदारद थी। तब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर सहित कई बड़े नेताओं ने पार्टी मंचों पर सार्वजनिक रूप से इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
इसके अलावा रिज मैदान पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित करने के लिए उनके पुत्र व कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह को काफी संघर्ष करना पड़ा था। 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने सरकार द्वारा जमीन न दिए जाने का दर्द बयां किया था। सुक्खू और वीरभद्र सिंह के बीच राजनीतिक मतभेद हमेशा से जगजाहिर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक दोनों नेताओं में लंबे समय से खींचतान चलती रही है। मौजूदा समय में सुक्खू गुट संगठन और सरकार पर हावी नजर आता है। हालांकि मुख्यमंत्री सुक्खू सार्वजनिक रूप से इस मामले को हवा देने से बचते दिख रहे हैं, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह का जिक्र न के बराबर होना चर्चा का विषय बना हुआ है।