Shimla News: हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन का एलान कर दिया है। समिति पहले चरण में गांधीवादी तरीके से अपना विरोध दर्ज करवाएगी। इसके तहत पेंशनरों की टोलियां हाथों में लाठी लेकर गांव-गांव जाएंगी और 12 नवंबर तक पेंशनरों को एकजुट करेंगी।
शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा और सेनराम नेगी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सचिवालय में पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के साथ बैठक कर संगठन में फूट डालने की कोशिश की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखेगा।
मांगें न मानने पर विधानसभा और सचिवालय घेराव की चेतावनी
नेताओं ने बताया कि शिमला और किन्नौर से इस जनजागरण अभियान की शुरुआत की जाएगी। 2 अक्टूबर को ठियोग में गांधी जयंती पर आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प लिया जाएगा। यदि सरकार ने वार्ता के लिए नहीं बुलाया, तो दूसरे चरण में जिला स्तर पर क्रमिक अनशन शुरू होगा और मंत्रियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
समिति ने आरोप लगाया कि 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए करीब 43 हजार पेंशनरों को संशोधित वित्तीय लाभ नहीं मिले हैं। पेंशनर लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और एरियर से वंचित हैं। इसके अलावा 15 प्रतिशत डीए की मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में गहरा रोष है।