Washington News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके विकास की रफ्तार रोकने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिका वैश्विक होड़ में चीन से अपनी बढ़त नहीं खो सकता, क्योंकि भविष्य की इस तकनीकी दौड़ में अव्वल रहना बेहद जरूरी है।
आयरलैंड दौरे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एआई पर सख्त पाबंदियां लगाने के विचार को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक को लेकर ज्यादातर आशंकाएं केवल नकारात्मक सोच हैं। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि कुछ नियमों की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नीति या रूपरेखा पेश नहीं की।
चीन से आगे रहने की रणनीतिक मजबूरी
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य चिंता चीन के साथ जारी तकनीकी प्रतिस्पर्धा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एआई के क्षेत्र में चीन से काफी आगे है और इस दबदबे को किसी कीमत पर गंवाना नहीं चाहते। इस महीने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ प्रस्तावित बैठक में एआई का यह विषय बातचीत का प्रमुख केंद्र रह सकता है।
ट्रंप का यह बयान एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई की उस मांग के जवाब में आया है, जिसमें सुरक्षा के लिए एआई की रफ्तार धीमी करने की वकालत की गई थी। ओपनएआई प्रमुख सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क जैसे कई बड़े टेक दिग्गजों ने भी एआई से जुड़े संभावित खतरों और सुरक्षा चिंताओं पर पूर्व में सहमति जताई है।
डेटा सेंटर और चुनावी राजनीति का नया केंद्र
अमेरिका में एआई अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। बड़ी टेक कंपनियां ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित कर रही हैं। इन सेंटरों में भारी मात्रा में बिजली और पानी की खपत होने से स्थानीय लोग और किसान चिंतित हैं। दोनों पार्टियों के कुछ नेता विरोध कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप विस्तार के पक्षधर हैं।
दूसरी तरफ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने डेमोक्रेटिक पार्टी को सलाह दी है कि वे एआई को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाएं। ओबामा का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा और नौकरियों पर पड़ते असर को लेकर स्पष्ट रणनीति पेश करनी चाहिए। अमेरिका में अब बहस तकनीक की रफ्तार, ऊर्जा संकट, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन पर टिक गई है।