London News: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता एंडी बर्नहैम ने सोमवार को देश के नए प्रधानमंत्री के पद की शपथ ले ली है। इसके साथ ही वे बीते 10 सालों में ब्रिटेन की सत्ता संभालने वाले सातवें प्रधानमंत्री बन गए हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट से अपना विदाई भाषण दिया। इसके बाद उन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय को इस्तीफा सौंप दिया। इसके तुरंत बाद एंडी बर्नहैम ने बकिंघम पैलेस पहुंचकर किंग चार्ल्स से मुलाकात की और नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी कर ली।
नई कैबिनेट का गठन और भारतीय मूल के नेताओं को जगह
प्रधानमंत्री बनते ही एंडी बर्नहैम ने अपनी नई कैबिनेट की घोषणा कर दी। उन्होंने कई अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताया है। इस कैबिनेट में दो भारतवंशी नेताओं को जगह मिली है। कनिष्क नारायण को एआई मंत्री और लीजा नंदी को संस्कृति मंत्री का पद दिया गया है।
कैबिनेट में जॉन हीली को वित्त मंत्री और पूर्व ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। शबाना महमूद गृह मंत्री के पद पर बनी रहेंगी, जो अपनी सख्त इमिग्रेशन नीतियों के लिए जानी जाती हैं। वहीं युवेट कूपर को नया स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है।
डिजिटल पहचान पत्र योजना को रद्द करने का पहला फैसला
नवेली सरकार ने अपना पहला बड़ा फैसला लेते हुए डिजिटल पहचान पत्र योजना को रद्द कर दिया है। यह योजना सितंबर 2025 में कीर स्टार्मर सरकार लेकर आई थी। विपक्ष और नागरिक अधिकार समूहों ने निजता और डेटा सुरक्षा का हवाला देकर इसका भारी विरोध किया था।
नई सरकार के सामने मौजूद 5 सबसे बड़ी चुनौतियां
नई सरकार के सामने धीमी आर्थिक वृद्धि, महंगाई और लोगों के जीवन स्तर में सुधार जैसी पांच प्रमुख चुनौतियां हैं। बर्नहैम ने टैक्स न बढ़ाने और आम लोगों को राहत देने का वादा किया है। इसके अलावा विदेशी संबंधों को संभालना भी उनके लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
बर्नहैम को यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका से संबंधों को बेहतर बनाए रखना होगा। रक्षा बजट बढ़ाने, सेना के आधुनिकीकरण और अवैध इमिग्रेशन पर लगाम लगाने के साथ-साथ वेलफेयर पर होने वाले सरकारी खर्च को नियंत्रित करना नई सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा।