Tehran News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटाने के लिए एक नए समझौते का प्रारंभिक मसौदा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा एनरिच्ड यूरेनियम तीसरे देश को सौंपने, अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और सहमति के सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलने की शर्तें शामिल हैं।
अमेरिका और ईरान के मध्य लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव को कम करने के उद्देश्य से एक नए समझौते का प्रारूप सामने आया है। अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस शांति प्रस्ताव में मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को शामिल किया गया है।
प्रस्ताव के तहत ईरान के सामने दो प्रमुख विकल्प रखे गए हैं। पहले विकल्प के अनुसार ईरान अपना एनरिच्ड यूरेनियम किसी तीसरे देश को सौंप सकता है, जबकि दूसरे विकल्प के तहत उसे यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) के स्तर को कम करना होगा। इसके बदले में अमेरिका को ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और अन्य पाबंदियों में क्रमिक ढील देनी होगी।
7 दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्त
प्रस्ताव की एक अहम शर्त यह है कि दोनों पक्षों में शुरुआती सहमति बनने के सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन के लिए खोल दिया जाए। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह समुद्री मार्ग बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा कच्चा तेल और गैस का व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यहां जहाजों की निर्बाध आवाजाही बहाल होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।
दोहा में वार्ता की संभावना, चीन बन सकता है गारंटर
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता तुर्किये के इस्तांबुल के बजाय कतर की राजधानी दोहा में आयोजित की जा सकती है। हाल ही में कतर ने इस मुद्दे को लेकर ईरान के साथ करीब 12 घंटे तक मैराथन बैठक की थी।
इस समझौते के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए चीन को एक गारंटर देश के रूप में शामिल करने का विकल्प भी रखा गया है, जो यह निगरानी रखेगा कि दोनों देश अपने वादों पर खरे उतर रहे हैं या नहीं। हालांकि, यह अभी एक प्रारंभिक प्रस्ताव है और इस पर दोनों पक्षों की अंतिम सहमति बनना शेष है।
स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था और पारस्परिक कदम
प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि दोनों देशों को चरणबद्ध तरीके से एक-दूसरे के कदमों के अनुरूप आगे बढ़ना होगा। बिना परमाणु प्रतिबद्धताओं के अमेरिका प्रतिबंध हटाने के लिए बाध्य नहीं होगा, और न ही ईरान बिना ठोस राहत के कदम पीछे खींचेगा।
समझौते की शर्तों की निष्पक्ष समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र निगरानी प्रणाली स्थापित करने की बात भी कही गई है, जो प्रत्येक चरण पर दोनों देशों द्वारा उठाए गए कदमों की जांच करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल कागजी वादे न हों बल्कि जमीनी स्तर पर भी अमल किया जा रहा है।