जर्मनी और स्पेन से अलग होकर फ्रांस अपने दम पर बनाएगा छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, वित्तीय साझेदारी के लिए भारत पर नजर

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International News: फ्रांस ने जर्मनी और स्पेन के साथ चल रहे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट (FCAS) से अलग होकर अकेले विमान बनाने का फैसला किया है। इस नए प्रोजेक्ट को ‘अवियन डी कॉम्बैट डू फ्यूचर’ (ACF) नाम दिया गया है। भारी खर्च को देखते हुए फ्रांस अब भारत जैसे वित्तीय साझेदारों की तलाश कर रहा है।

फ्रांस ने जर्मनी और स्पेन के साथ मिलकर छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (FCAS) बनाने की साझा योजना से अलग होकर अब अपने दम पर राफेल से भी आधुनिक फाइटर जेट विकसित करने का फैसला किया है। जर्मनी के साथ हुए विवाद और मतभेदों के बाद फ्रांस ने राष्ट्रीय स्तर पर अकेले ही इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। फ्रांस की सशस्त्र बल मंत्री कैथरीन वौत्रिन ने संसदीय सुनवाई के दौरान इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में ही इस प्रोजेक्ट को नेशनल फॉर्मेट (राष्ट्रीय प्रारूप) में आगे बढ़ाने का निर्णय ले लिया गया था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल लड़ाकू विमान की क्षमता सामने आई थी, जब पाकिस्तान में एयरबेस को नुकसान पहुंचाया गया था। अब फ्रांस का लक्ष्य राफेल से कई गुना अधिक ताकतवर लड़ाकू विमान तैयार करना है।

नए प्रोजेक्ट का नाम होगा ‘अवियन डी कॉम्बैट डू फ्यूचर’ (ACF)

‘डिफेंस एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी और स्पेन से अलग होने के बाद फ्रांस ने इस प्रोजेक्ट का नाम भी बदल दिया है। अब इसे ‘न्यू जनरेशन एयरक्राफ्ट’ के बजाय ‘अवियन डी कॉम्बैट डू फ्यूचर’ (Avion de Combat du Futur – ACF) यानी ‘भविष्य का लड़ाकू विमान’ नाम दिया गया है।

फ्रांसीसी वायुसेना प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर के मुताबिक, फिलहाल इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। फ्रांस अपने पुराने एफसीएएस (FCAS) प्रोजेक्ट और राफेल एफ-5 (Rafale F5) की तकनीक का इस्तेमाल करके साल 2027 में नए एयरक्राफ्ट डेमोंस्ट्रेटर पर काम शुरू करने की तैयारी में है। इसके साथ ही ड्रोन, गाइडेड हथियारों और कॉम्बैट क्लाउड जैसी तकनीकों पर भी काम जारी रहेगा।

आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत बन सकता है साझेदार

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी के साथ साझा प्रोजेक्ट में लगे झटके के बाद फ्रांस ने दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने और उत्पादन पर पूरा नियंत्रण रखने के लिए यह कदम उठाया है। फ्रांस के पास लड़ाकू विमान बनाने की पूरी तकनीक मौजूद है, लेकिन मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के बीच अकेले दम पर इस प्रोजेक्ट का भारी-भरकम खर्च उठाना उसके लिए आसान नहीं है।

इसी वजह से फ्रांस अब तकनीकी साझेदार के बजाय वित्तीय निवेशकों (फाइनेंशियल इन्वेस्टर्स) की तलाश कर रहा है। इस क्रम में भारत का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, क्योंकि भारत पहले ही फ्रांस के साथ इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की इच्छा जता चुका है। इसके अलावा स्वीडन के साथ भी सहयोग को लेकर चर्चाएं हुई हैं। फ्रांस ने साल 2040 की शुरुआत तक छठी पीढ़ी के इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य रखा है।

Suresh Kumar
Suresh Kumar
क्रिमिनल लॉयर, पत्रकारिता में 13 वर्ष का अनुभव

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