जामिया विवाद: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने खुद को बताया ‘दिमागी नक्सल’, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का तीखा पलटवार

Share

- Advertisement -

New Delhi News: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया और केंद्र पर सवाल उठाए। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा पलटवार करते हुए उन्हें लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में दिए गए बयान और खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताए जाने पर केंद्र सरकार की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अभिनेता की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘खतरनाक शहरी दिमागी नक्सली’ करार दिया है।

किरेन रिजिजू ने ‘एक्स’ पर साधा निशाना

नसीरुद्दीन शाह के बयान पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की। रिजिजू ने लिखा, “मुझे लगता था कि नसीरुद्दीन शाह बस एक साधारण अभिनेता हैं। मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था… मुझे कभी पता ही नहीं था कि वह एक खतरनाक ‘शहरी दिमागी नक्सली’ हैं! मुझे उनके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला। भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है।”

नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो जारी कर केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

इससे पहले, 76 वर्षीय अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने 27 अक्टूबर को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने का प्रयास कर रही है। वीडियो में शाह ‘दिमागी नक्सल’ लिखा हुआ एक बैज लगाए नजर आए, जिसे उन्होंने कैमरे के सामने भी दिखाया।

शाह ने वीडियो में कहा, “मैं गर्व से घोषणा करता हूं कि मैं ‘दिमागी नक्सल’ हूं। मुझे नहीं पता कि पहरेदारों ने मेरे जैसे लोगों को और कौन-कौन से उपनाम दिए हैं – राष्ट्रविरोधी, ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग और न जाने क्या-क्या।” उन्होंने आगे सरकार से सवाल करते हुए कहा, “मैं इस सरकार से एक सवाल पूछना चाहता हूं। हमारे देश के युवाओं का हौसला तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए आप और क्या करेंगे? आप कितना करेंगे? आप कहां तक जाएंगे?”

अन्य परिसरों के मामलों का भी किया उल्लेख

अपनी बात रखते हुए नसीरुद्दीन शाह ने अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने आमिर अजीज की लोकप्रिय रचना का हवाला देते हुए कहा, “पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, फिर सत्यजीत रे फिल्म संस्थान और अब जामिया मिल्लिया। छात्रों पर जो अत्याचार किए जा रहे हैं, उन्हें याद रखा जाएगा। सब कुछ याद रखा जाएगा।” इसके साथ ही उन्होंने बिस्मिल अजीमाबादी की मशहूर गजल की पंक्ति “देखना है जोर कितना बाजू-ए कातिल में है” का भी पाठ किया।

गौरतलब है कि नसीरुद्दीन शाह लगातार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) के छात्रों के धरने का भी समर्थन किया था।

जामिया में 2006 से लंबित हैं छात्र संघ चुनाव

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि प्रशासन छात्र संघ चुनावों की निश्चित तारीख घोषित करे और संघ के संविधान को औपचारिक मंजूरी देने के लिए एक स्पष्ट समयसीमा तय करे। इसी मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलनरत हैं, जिस पर अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी खींचतान शुरू हो चुकी है।

Read more

Related News