New Delhi News: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आयोजित की जा रही है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने संसद और कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। इस बीच चुनावी निष्पक्षता और 1984 के मुद्दे पर भाजपा और विपक्ष में तीखा सियासी टकराव देखने को मिला।
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की तरफ से ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली का आयोजन किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित इस रैली में शामिल होने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ओपन बस में सवार होकर रामलीला मैदान की ओर रवाना हुए। इससे पहले विपक्षी दलों के सांसद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एकत्रित हुए थे। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मार्च का नक्शा साझा करते हुए आम लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की थी।
विपक्ष का आरोप: लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर हमला
रैली को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि रामलीला मैदान में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं और जनता विपक्ष के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष मतदाताओं के उन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, जिससे वे अपना भविष्य स्वयं तय कर सकें। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि यह लड़ाई वोट के अधिकार की रक्षा और संविधान को बचाने के लिए लड़ी जा रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने उठाया मतदाता सूची का मुद्दा
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने रैली में शामिल होने से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में चुनावी और प्रशासनिक स्तर पर विसंगतियां सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सत्ता पक्ष खुद बड़ी संख्या में वोटों के घटने की बात कर रहा है, तो चुनाव आयोग और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वास्तविक स्थिति क्या है और मतदाता सूचियों में किस आधार पर बदलाव किए गए हैं।
भाजपा का पलटवार: 1984 के दंगों को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना
विपक्षी रैली के जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर तीखा हमला बोला। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि रैली के नाम पर दिल्ली में सामान्य जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियों को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों का स्मरण कराते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सिखों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। दूसरी ओर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जो दल आज वोट की रक्षा की बात कर रहे हैं, उन्होंने पूर्व में लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ खिलवाड़ किया था। इसके समानांतर, भाजपा ने पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर से तिलक नगर तक 1984 के सिख दंगों के विरोध में एक मार्च भी निकाला, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, शांतिपूर्ण रहा मार्च
दिल्ली पुलिस के स्पेशल पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस लगातार रैली के आयोजकों से संपर्क में है और स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी हुई है। जवाहरलाल नेहरू मार्ग और सिविक सेंटर राउंडअबाउट के रास्ते विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं का रामलीला मैदान में प्रवेश हुआ, जहां छात्र संगठन एसएफआई (SFI) समेत कई सामाजिक और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि भी पहुंचे।