Kolkata News: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को विधानसभा में 21 जुलाई 1993 की पुलिस गोलीबारी घटना पर गठित न्यायमूर्ति सुशांत चट्टोपाध्याय आयोग की रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में आयोग ने माना कि यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी और मौतों को कानूनी रूप से जायज नहीं ठहराया जा सकता।
रिपोर्ट के हवाले से मुख्यमंत्री ने बताया कि तत्कालीन गृह सचिव मनीष गुप्ता के आदेश पर गोलीबारी की गई थी। आयोग को बल प्रयोग के पक्ष में कोई ठोस वजह या उकसावा नहीं मिला। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है।
ममता बनर्जी से पूछताछ न होने पर घेरा
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 44 गवाहों से पूछताछ की गई, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कोई सवाल-जवाब नहीं हुआ, जबकि वह मार्च का नेतृत्व कर रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी ने इस घटना का राजनीतिक फायदा उठाया और मनीष गुप्ता की भूमिका को छिपाकर उन्हें सरकार में पद भी दिए।
यह घटना 1993 की है जब मतदाता पहचान पत्र की मांग को लेकर राइटर्स बिल्डिंग की ओर मार्च कर रहे यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने गोलियां चलाई थीं, जिसमें 13 लोग मारे गए थे। राज्य सरकार ने कहा है कि पीड़ित परिवार यदि जिम्मेदार लोगों पर नई प्राथमिकी दर्ज कराना चाहते हैं तो उन्हें कानूनी मदद दी जाएगी।