Koraput News: ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से विवादित कोटिया क्षेत्र में एक बार फिर दोनों राज्यों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। कोरापुट जिले के ऊपरी सेम्बी गांव में आंध्र प्रदेश की ओर से मुफ्त सौर उपकरण वितरित करने की कोशिश को ओडिशा प्रशासन और पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए रोक दिया। प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद आंध्र प्रदेश के प्रतिनिधियों को सौर उपकरणों से भरा ट्रक लेकर वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों का एक दल बड़े ट्रक में सौर उपकरण लेकर ऊपरी सेम्बी गांव पहुंचा था। उनकी योजना दोपहर करीब दो बजे गांव के लगभग 36 परिवारों को मुफ्त सोलर किट वितरित करने की थी। इस गतिविधि की भनक लगते ही ओडिशा प्रशासन सतर्क हो गया और राजस्व विभाग के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन व कोटिया पुलिस की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई। टीम ने विवादित क्षेत्र में बिना अनुमति कल्याणकारी योजनाओं के तहत उपकरण बांटे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।
प्रशासन की आपत्ति के बाद वापस लौटा दल
ओडिशा के अधिकारियों के कड़े विरोध के बाद आंध्र प्रदेश के प्रतिनिधियों को अपना कार्यक्रम बीच में ही रोकना पड़ा। वे सौर उपकरणों से भरे ट्रक के साथ गांव से वापस लौट गए। इस कार्रवाई को कोटिया क्षेत्र में अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को लेकर ओडिशा सरकार की कड़ी सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटना के संबंध में दोनों राज्यों के प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया आनी अभी बाकी है।
कोटिया को लेकर रहा है पुराना सीमा विवाद
कोटिया क्षेत्र लंबे समय से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमा तथा प्रशासनिक अधिकारों को लेकर विवाद का केंद्र बना हुआ है। दोनों राज्यों की ओर से इस क्षेत्र में विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और स्थानीय निवासियों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने की कोशिशें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। ऐसे आयोजनों को लेकर दोनों राज्यों के बीच पहले भी कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है।
इस ताजा घटना के बाद ओडिशा प्रशासन ने कोटिया और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सतर्कता और अधिक बढ़ा दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को लेकर किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। यह घटना एक बार फिर संकेत देती है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर दोनों राज्यों के बीच आपसी समन्वय और विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की सख्त आवश्यकता है।