Delhi News: कारगिल युद्ध के 27 साल पूरे होने पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मलिक ने भारतीय सेना की बदलती क्षमताओं पर विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि 1999 के युद्ध से मिले सबकों ने देश की सैन्य तैयारियों और रणनीतिक सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए साक्षात्कार में जनरल मलिक ने बताया कि दो दशकों की तैयारियों का ही नतीजा है कि सेना अब अधिक सक्षम हुई है। हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने सीमा पार किए बिना ही दुश्मन के प्रमुख ठिकानों और रडार स्टेशनों पर सटीक प्रहार किए।
निगरानी और आधुनिक मिसाइल प्रणालियों पर बढ़ी निर्भरता
पूर्व सेना प्रमुख ने बताया कि कारगिल से मिला सबसे बड़ा सबक खुफिया तंत्र और निगरानी क्षमताओं को मजबूत बनाना था। आज भारतीय सशस्त्र बल लंबी दूरी के ड्रोन, उन्नत रॉकेट सिस्टम, ब्रह्मोस, आकाश और एस-400 जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियों का प्रभावी उपयोग कर रहे हैं जिसका परीक्षण भी हो चुका है।
उन्होंने बताया कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस के गठन से तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल कायम हुआ है। कारगिल समीक्षा समिति की सिफारिशों पर अमल करते हुए एकीकृत त्रि-सेवा कमान बनाई गई, जिससे देश की रक्षा क्षमता पहले की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत हो चुकी है।
तकनीक के साथ सैनिक का मनोबल सबसे बड़ा कारक
तकनीकी प्रगति की सराहना करते हुए जनरल मलिक ने कहा कि युद्ध केवल आधुनिक हथियारों से नहीं बल्कि सैनिकों के मनोबल से जीते जाते हैं। उन्होंने कहा कि हथियार के पीछे खड़ा जवान सबसे महत्वपूर्ण होता है और विषम परिस्थितियों में तैनात जवानों के हौसले से ही नेतृत्व को ऊर्जा मिलती है।
श्रीमदभगवद गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सेना एक आर्केस्ट्रा की तरह काम करती है जहां रसद और संचार जैसी सहायक सेवाओं का तालमेल बेहद जरूरी है। ज्ञान से श्रेष्ठ कर्म है और हमारे युवा अधिकारियों तथा जवानों ने दुर्गम ऊंचाइयों पर अपने कर्म के बल पर ही ऐतिहासिक जीत हासिल की।