Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों के बीच हमीरपुर जिले में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर मतभिन्नता सामने आई है। मामले में जस्टिस अतुल श्रीधरन ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए मृत्युदंड जैसी सख्त सजा पर विचार करने का सुझाव दिया है।
राम मंदिर दान चोरी विवाद का फैसले में उल्लेख
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अपने आदेश में लिखा कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल से दान की चोरी होना और समाज का अप्रभावित रहना नैतिक गिरावट का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दशकों से औसत भारतीय ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है। अधिकारी रिश्वत लेकर अवैध निर्माण पर आंखें मूंद लेते हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन की मांग
हाईकोर्ट ने पाया कि बिल्डरों और अधिकारियों की मिलीभगत से बने अवैध निर्माणों का खामियाजा आम खरीदार को भुगतना पड़ता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में संशोधन किया जाए। दोषियों को मृत्युदंड देने जैसे कड़े प्रावधानों पर विचार होना चाहिए।
बुलडोजर कार्रवाई पर जजों की अलग-अलग राय
बुलडोजर कार्रवाई के समय और नियमों को लेकर खंडपीठ के दोनों न्यायाधीशों की राय अलग रही। जस्टिस श्रीधरन ने एफआईआर के बाद दो साल तक ध्वस्तीकरण पर रोक और एक साल पहले नोटिस की बात कही। वहीं जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने इस समयसीमा को अवांछित न्यायिक सक्रियता मानते हुए असहमति जताई।
मामला अंतिम फैसले के लिए चीफ जस्टिस को भेजा
दोनों जजों के बीच दो मुख्य कानूनी बिंदुओं पर सहमति न बनने के कारण मामला मुख्य न्यायाधीश के पास रेफर कर दिया गया है। चीफ जस्टिस अब इसे किसी तीसरे जज या अन्य पीठ को सौंपेंगे। हालांकि दोनों जज दोषी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच पर पूरी तरह सहमत दिखे।