Shimla News: हिमाचल प्रदेश के मिड डे मील (एमडीएम) कर्मचारियों ने मानदेय बढ़ाने, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा की पुरजोर मांग उठाई है। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के बैनर तले रविवार को शिमला में राज्य स्तरीय अधिवेशन का आयोजन हुआ। इसमें विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
अधिवेशन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से स्कूलों में बच्चों को खाना बनाने की सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संघ ने सरकार से मिड डे मील रसोइयों और सहायकों का न्यूनतम मासिक मानदेय 26 हजार रुपये करने की मांग की।
दस वर्ष की सेवा पूरी कर चुके वर्करों के नियमितीकरण की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने मांग रखी कि 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए। उन्हें स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों को ईएसआई, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी दिया जाना चाहिए।
संगठन ने स्पष्ट किया कि स्कूलों की छुट्टियों और गर्मियों की बंदी के दौरान भी वर्करों को पूरा मानदेय मिले। यह कर्मचारी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं, इसलिए इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होनी चाहिए। यदि सरकार ने मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अधिवेशन में संगठन की नई कार्यकारिणी का चुनाव भी संपन्न हुआ। अर्जुन नेगी को अध्यक्ष, दिला राम शर्मा को महामंत्री, किरपा राम को उपाध्यक्ष और मेहर सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया। कार्यक्रम में बीएमएस के प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, जिला अध्यक्ष हेत राम शर्मा और देवेंद्र चोपड़ा भी उपस्थित रहे।