Nurpur News: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है। उन्होंने संस्कृत को भारत की सभ्यतागत, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत की मुख्य नींव के रूप में रेखांकित किया है। नूरपुर के पास मलक्वाल में आयोजित अखिल भारतीय संस्कृत भारती सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने युवा पीढ़ी से देश की समृद्ध ज्ञान परंपराओं को व्यापक रूप से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
संस्कृत ज्ञान, दर्शन और मूल्यों का माध्यम
राज्यपाल गुप्ता ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संस्कृत केवल एक भाषा भर नहीं है, बल्कि यह वह सशक्त माध्यम है जिसके जरिए वेदों, उपनिषदों, रामायण और महाभारत ने हजारों वर्षों से भारत के ज्ञान, दर्शन, विज्ञान, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को समाज तक प्रसारित किया है। उन्होंने आर्यभट्ट, पाणिनी, चरक, सुश्रुत, वराहमिहिर और भास्कर जैसे प्राचीन भारतीय मनीषियों और विद्वानों के ऐतिहासिक योगदान को अधिक मान्यता देने की आवश्यकता बताई, जिनके कार्यों ने वैश्विक ज्ञान को भी समृद्ध किया है।
तक्षशिला और नालंदा जैसे महान प्राचीन संस्थानों की चर्चा करते हुए उन्होंने भारत के एक बार फिर ज्ञान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति पुनः हासिल करने की परिकल्पना की। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की पहलों, जैसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों की स्थापना की सराहना की, जो भारतीय भाषाओं और विरासत को लगातार बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने ‘विकसित भारत@2047’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीकों से जोड़ने पर बल दिया।
स्थानीय बोलियों और टांकरी लिपि का महत्व
हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि’ बताते हुए राज्यपाल ने गद्दी जैसी स्थानीय बोलियों में मौजूद संस्कृत-मूल के शब्दों और ऐतिहासिक टांकरी लिपि के महत्व का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि वे संस्कृत अध्ययन को और अधिक बढ़ावा दें, जिसे वर्ष 2019 से राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। इस अवसर पर राज्यपाल गुप्ता ने राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई और सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 151वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश के एकीकरण में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की।