हिमाचल में बीजेपी सरकार बनने पर खुलेंगे आरएसएस संचालित स्कूल, मंडी सांसद कंगना रनौत ने की जोरदार वकालत

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Mandi News: हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने राज्य में बीजेपी की सरकार बनने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संचालित स्कूल खोलने की पुरजोर वकालत की है। गौरतलब है कि राज्य में फिलहाल कांग्रेस पार्टी की सरकार चल रही है।

सांसद कंगना रनौत की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के उस हालिया प्रस्ताव के बाद आई है। अधिकारी ने अपने राज्य में कम से कम 1,000 विद्या भारती संस्थान स्थापित करने की बात कही थी। हालांकि विपक्षी दलों ने अधिकारी के इस बयान की तीखी आलोचना की थी।

मंडी जिले में ‘जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति’ की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कंगना ने यह बात कही। पीटीआई-वीडियो से बातचीत में उन्होंने अधिकारी की पहल का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा, ”मैं चाहूंगी कि जब राज्य में हमारी सरकार सत्ता में आए तो हिमाचल में भी ऐसी योजनाएं शुरू की जाएं।”

बीजेपी सांसद ने आगे कहा, ”यह एक बहुत अच्छी पहल है और इसे हिमाचल प्रदेश में भी लागू किया जाना चाहिए।” रनौत ने आरएसएस को राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि इस संगठन ने देश में कई स्कूल स्थापित किए हैं और किसी भी संकट के समय में लगातार देश की सेवा की है।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आरएसएस द्वारा संचालित स्कूल और विभिन्न शैक्षणिक पहल बच्चों को बेहतर अवसर प्रदान करते हैं। एकलव्य मॉडल स्कूल जैसे संस्थान और नीट परीक्षा की तैयारी कराने वाले स्कूल ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में बच्चों के भविष्य को संवारने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक आरएसएस का शिक्षा प्रकोष्ठ विद्या भारती पश्चिम बंगाल में अपने स्कूल नेटवर्क के विस्तार की तैयारी कर रहा है। संघ की योजना अगले कुछ वर्षों में राज्य के सभी 345 प्रखंडों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की है। इस योजना को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

इससे पहले आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने अधिकारी के बयान की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि सरकार आरएसएस से जुड़े स्कूल कैसे खोल सकती है। सौरभ भारद्वाज ने आरएसएस को एक ‘अपंजीकृत संस्था’ बताते हुए बीजेपी के इस कदम का कड़ा विरोध किया था।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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