Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती के कड़े नियम अधिसूचित कर दिए हैं। पूरी प्रक्रिया जियो-टैगिंग और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी। लाइसेंसधारकों को फसल सुरक्षा और सभी नियमों का पूरी सख्ती से पालन करना होगा।
कटाई से 21 दिन पहले देनी होगी सूचना
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भांग का उपयोग सिर्फ दवा और वैज्ञानिक कार्यों में ही हो सकेगा। फसल की कटाई से 21 दिन पहले संबंधित अधिकारी को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा। पूरी फसल की कटाई एक बार में ही करनी होगी, आंशिक कटाई की अनुमति नहीं मिलेगी।
खेती के लिए न्यूनतम 3 एकड़ जमीन होना जरूरी है। इससे कम जमीन पर लाइसेंस नहीं मिलेगा। खेत के चारों तरफ फेंसिंग और एक ही एंट्री पॉइंट की अनिवार्यता रखी गई है। राज्य के बाहर या विदेश से बीज लाने पर पूरी तरह रोक रहेगी, सिर्फ स्थानीय स्वीकृत बीज ही प्रयोग होंगे।
डीसी की अध्यक्षता में गठित होगी जिला समिति
लाइसेंस के लिए पहला आवेदन कृषि विभाग के पास जमा होगा। कृषि विभाग जांच के बाद इसे राज्य कर एवं आबकारी विभाग को भेजेगा। जिला स्तर पर उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में एक कमेटी बनेगी, जिसमें एसपी, फॉरेस्ट, रेवेन्यू और ड्रग इंस्पेक्टर शामिल रहेंगे।
सरकार ने लाइसेंस फीस भी तय कर दी है। बीज सप्लाई के लाइसेंस के लिए 25,000 रुपये और खेती के लिए 3 लाख रुपये लगेंगे। वहीं प्रोसेसिंग कर उत्पाद बनाने का लाइसेंस 2 करोड़ रुपये में मिलेगा। समिति नियमों के पालन के लिए नियमित निरीक्षण करेगी।