Shimla News: अनुबंध सेवा की अवधि को नियमित सेवा की वरिष्ठता में शामिल किए जाने के मामले में हिमाचल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही अनुबंध कर्मचारियों को परिणामी वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट में दिसंबर से सुनवाई होगी।
अनुबंध सेवा की वरिष्ठता को नियमित सेवा में जोड़े जाने से रोकने के मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर रिव्यू (पुनर्विचार) याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके पूर्व में पारित आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है जिसके आधार पर उस पर दोबारा विचार किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने हिमाचल सरकार एवं अन्य की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर यह आदेश सुनाया। यह याचिका देविंद्र कुमार एवं अन्य से जुड़े मामले में विशेष अनुमति याचिका संख्या 24885/2026 में पारित आदेश के संदर्भ में दाखिल की गई थी।
मौखिक सुनवाई का आवेदन नामंजूर, आदेश में त्रुटि से इनकार
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले में मौखिक सुनवाई की अनुमति के लिए दायर आवेदन को खारिज किया जाता है। हालांकि अदालत ने रिव्यू याचिका दाखिल करने में हुई समय की देरी को माफ कर दिया था। इसके बाद पीठ ने पुनर्विचार याचिका और उसके समर्थन में दिए गए कानूनी आधारों पर विचार किया, लेकिन पूर्व में दिए गए आदेश में कोई तथ्यात्मक या कानूनी खामी नहीं पाई। इसी आधार पर याचिका और सभी लंबित आवेदनों का निस्तारण करते हुए इसे खारिज कर दिया गया।
हिमाचल प्रदेश में अनुबंध आधार पर सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता का मुद्दा लंबे समय से कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है। इसमें राज्य सरकार के कर्मचारी सेवा नियमों के प्रावधानों और अनुबंध अवधि को नियमित सेवा की वरिष्ठता में जोड़ने से जुड़े कई कानूनी पहलू शामिल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका पर कार्यवाही समाप्त हो गई है। हालांकि, आदेश में कर्मचारी नियमों की वैधता या उसके सभी प्रावधानों पर अलग से कोई विस्तृत व्याख्या दर्ज नहीं है, इसलिए इसके दूरगामी प्रभावों की समीक्षा मूल फैसले के आधार पर की जाएगी।
दिसंबर से हाईकोर्ट में अवमानना और निष्पादन याचिकाओं पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अनुबंध सेवा की वरिष्ठता और उसके परिणामी लाभ कर्मचारियों को प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को चार महीने का समय दिया था, जिसमें से दो महीने की अवधि पूरी हो चुकी है।
दूसरी ओर, हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित अवमानना और निष्पादन (एक्जीक्यूशन) याचिकाओं पर दिसंबर महीने से सुनवाई शुरू की जाएगी। शीर्ष अदालत की चार महीने की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को यह समय दिया है। दिसंबर से संबंधित विभागों के प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को कर्मचारियों के वित्तीय लाभों और देय भुगतान पर ठोस निर्णय लेना होगा।