सरकारी स्कूल के टाट से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक: सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बच्चों से साझा किए संघर्ष के दिन

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Chamba News: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पीएम श्री आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैहला में विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बच्चों से साझा किया कि कैसे वे कभी सरकारी स्कूल में टाट पर बैठकर पढ़ाई करते थे और अपनी मेहनत व हौसले के बल पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। मुख्यमंत्री के इस प्रेरणादायक संवाद ने बच्चों में नए सपनों को उड़ान देने का जज्बा पैदा किया।

40 विद्यार्थियों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री, बच्चों ने साझा किए सपने

विद्यालय पहुंचते ही मुख्यमंत्री करीब 40 विद्यार्थियों के बीच पहुंचे। उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया, गले मिले और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में पूछा। इस दौरान 10 बच्चों ने पुलिस अधिकारी, 15 ने अध्यापक और 10 ने सेना में जाने की इच्छा जताई। इसके अलावा दो बच्चों ने वकील, एक ने प्रशासनिक सेवा अधिकारी, एक ने कमांडो और एक ने चिकित्सक बनने का सपना साझा किया। जब मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए पूछा कि कोई नेता क्यों नहीं बनना चाहता, तो किसी ने हाथ नहीं उठाया। इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि वे स्वयं भी सरकारी स्कूल से पढ़कर ही इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

स्कूल की समस्याओं पर दो करोड़ रुपये देने की घोषणा

संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी समस्याएं भी मुख्यमंत्री के सामने बेझिझक रखीं। 12वीं की छात्रा सुहानी ने कमरों की कमी का मुद्दा उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने नए भवन के लिए दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की। वहीं, पांचवीं के छात्र गोविंद की मांग पर बड़ा हॉल बनाने और 11वीं के छात्र परम चौहान की मांग पर बंद पड़ी बस सेवा को दोबारा शुरू करवाने का आश्वासन दिया।

तनाव दूर करने और जीवन से जुड़े कई गुर सिखाए

परीक्षा के दौरान तनाव से जुड़े एक सवाल पर मुख्यमंत्री ने सलाह दी कि तनाव होने पर पढ़ाई से ध्यान हटाकर दोस्तों और परिवार के सदस्यों से बातचीत करनी चाहिए तथा मोबाइल फोन का कम उपयोग करना चाहिए। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि प्रदेश का मुखिया होने के नाते आर्थिक संतुलन बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है और वे जनसेवा के कार्यों में व्यस्त रहने के कारण रविवार की छुट्टी भी नहीं लेते हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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