New Delhi News: भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई रिसर्च ने उम्मीदवारों के आवेदनों के आधार पर दुनिया की 14 सबसे बड़ी परीक्षाओं की लिस्ट जारी की है। इसमें 1.29 करोड़ आवेदनों के साथ चीन की गाओकाओ परीक्षा पहले नंबर पर है। वहीं, भारत की मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी करीब 25 लाख आवेदनों के साथ पांचवें पायदान पर काबिज है।
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा आवेदन चीन की नेशनल कॉलेज एंट्रेंस परीक्षा गाओकाओ में आते हैं। दूसरे स्थान पर ब्राजील की ईएनईएम परीक्षा है, जिसमें लगभग 48 लाख आवेदन मिले। चीन की सेंट्रल सिविल सर्विस परीक्षा गुओकाओ 37 लाख आवेदनों के साथ तीसरे और 34 लाख आवेदनों के साथ नेशनल मास्टर्स एंट्रेंस परीक्षा चौथे स्थान पर रही।
भारत की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 25 लाख आवेदकों के साथ पांचवें पायदान पर है। इसके बाद तुर्किये की वाईकेएस में 24 लाख और नाइजीरिया की यूटीएमई में 22 लाख रजिस्ट्रेशन दर्ज हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली सैट परीक्षा में 20 लाख और बांग्लादेश की एसएससी तथा समकक्ष परीक्षाओं में करीब 18 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं।
अमेरिका की एसीटी परीक्षा में करीब 14 लाख उम्मीदवार पंजीकृत हुए। भारत की प्रतिष्ठित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में लगभग 12 लाख आवेदन आए। बांग्लादेश की एचएससी परीक्षा में भी करीब 12 लाख रजिस्ट्रेशन हुए। इसके बाद भारत की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन में लगभग 10 लाख और यूपीएससी नेट परीक्षा में करीब 8 लाख आवेदन दर्ज किए गए हैं।
नीट यूजी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी परीक्षा बनी
भारत के लिए नीट यूजी की पांचवीं रैंकिंग बेहद खास है। यह देश भर में ग्रेजुएट स्तर पर मेडिकल कॉलेज में दाखिले की राष्ट्रीय परीक्षा है। इतने बड़े पैमाने पर आवेदनों के चलते इसका संचालन एक विशाल प्रशासनिक चुनौती बन जाता है। इसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, हजारों परीक्षा केंद्रों का प्रबंधन, सख्त बायोमेट्रिक जांच और रिजल्ट तैयार करने जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल हैं।
साल 2026 में 1.29 करोड़ आवेदकों वाली चीन की गाओकाओ परीक्षा के प्रबंधन को रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया। इस महा-परीक्षा के सफल आयोजन के लिए चीन ने 7,981 परीक्षा केंद्र और 3,48,000 परीक्षा कक्ष बनाए। किसी भी आपात स्थिति के लिए 21,000 कमरे रिजर्व रखे गए। साथ ही 14,000 से अधिक दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।