UP News: परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) के तहत अब बच्चों को नियमित भोजन के साथ-साथ मीठा हलवा और नमकीन उपमा भी परोसा जाएगा। शासन की ओर से नवंबर 2026 से फरवरी 2027 तक की अवधि के लिए इस पूरक पोषण व्यवस्था को लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस नई योजना के तहत प्रति छात्र हलवा तैयार करने के लिए सात रुपये और उपमा के लिए चार रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जिससे जिले के 1,508 परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 1.60 लाख बच्चों को लाभ मिलेगा।
कैलोरी और पोषण का रखा गया है पूरा ध्यान
शासन द्वारा जारी मानकों के अनुसार बच्चों को तय मात्रा में पोषणयुक्त हलवा और उपमा उपलब्ध कराया जाएगा।
- हलवा का मानक: हलवा बनाने के लिए प्रति छात्र 30 ग्राम सूजी, 5 ग्राम घी, 22 ग्राम चीनी और 5 ग्राम घिसा हुआ नारियल तय किया गया है। इससे बच्चों को 273 कैलोरी ऊर्जा और 4.06 ग्राम प्रोटीन प्राप्त होगा।
- उपमा का मानक: उपमा के लिए 30 ग्राम सूजी, 2 ग्राम तेल, 20 ग्राम मौसमी सब्जियां और 6 ग्राम मूंगफली निर्धारित की गई है, जिससे 173 कैलोरी ऊर्जा और 5.31 ग्राम प्रोटीन मिलेगा।
जिले के इतने विद्यालयों के बच्चों को मिलेगा लाभ
स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 291 कंपोजिट, 928 प्राथमिक और 280 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 9 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी शामिल हैं, जिनमें से 18 विद्यालय नगरीय क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। इन सभी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले करीब 1.60 लाख बच्चों को इस अतिरिक्त पूरक पोषण का फायदा मिलेगा।
रसोइयों को मिलेगा अतिरिक्त मानदेय और गुणवत्ता पर जोर
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि उपयोग में लाई जाने वाली खाद्य सामग्री पूरी तरह सुरक्षित, मानकीकृत और एफएसएसएआई (FSSAI) के नियमों के अनुरूप पैक्ड होनी चाहिए। साथ ही एक्सपायरी डेट का विशेष ध्यान रखने और खरीद से जुड़े बिल, तिथिवार विवरण व फोटोग्राफ सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
योजना के तहत रसोइयों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति विद्यार्थी प्रतिदिन दो रुपये का अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाएगा। यह राशि समान रूप से वितरित कर 31 मार्च 2027 से पहले उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी टास्क फोर्स, मां समूहों और विद्यालय प्रबंधन समितियों के माध्यम से की जाएगी, जबकि प्रदेश स्तर पर इसका सोशल ऑडिट भी कराया जाएगा।