Shimla News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी, नई समय-सारणी और छात्र संघ चुनाव बहाल करने को लेकर सोमवार को लॉ फैकल्टी में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। एसएफआई की अगुवाई में हुए इस विरोध प्रदर्शन के जरिए छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं।
एसएफआई के नेतृत्व में जुटे छात्रों ने कैंपस में जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने प्रशासन से बढ़ाई गई फीस तुरंत वापस लेने, नए टाइम टेबल में बदलाव करने और छात्र संघ चुनाव तुरंत कराने की मांग उठाई। छात्रों का कहना है कि प्रशासन लगातार उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रहा है।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एसएफआई के रोहित ने बताया कि यूनिवर्सिटी में अलग-अलग मदों में फीस बढ़ाई जा रही है। ट्यूशन फीस के साथ परीक्षा शुल्क, हॉस्टल फीस, बस किराया और थीसिस सबमिशन फीस में बढ़ोतरी की गई है। इससे आम छात्रों पर आर्थिक बोझ बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एक पब्लिक एजुकेशनल इंस्टीट्यूट है। यहां पढ़ाई करने वाले छात्रों को सस्ती और सुलभ शिक्षा मिलनी चाहिए। लगातार फीस बढ़ाने से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मिडिल क्लास परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को हो रही है। प्रशासन को तुरंत प्रभाव से यह बढ़ोतरी वापस लेनी चाहिए।
एसएफआई नेता पोविंदर ने यूनिवर्सिटी की नई समय-सारणी पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि टाइट टाइम टेबल और लगातार चलने वाली क्लासेस से छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। खासकर लॉ के स्टूडेंट्स को क्लास के बाद केस स्टडी, असाइनमेंट और सेल्फ स्टडी के लिए पूरा समय नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि नई समय-सारणी के कारण छात्रों को सेल्फ स्टडी का समय ही नहीं मिलता। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्टूडेंट्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टाइम टेबल में सुधार किया जाए। इससे पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा और छात्रों को अतिरिक्त मानसिक दबाव से भी राहत मिलेगी।
प्रदर्शन में छात्र संघ चुनाव की बहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। छात्र नेताओं ने कहा कि स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन युवाओं को लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय के फैसलों में छात्रों की हिस्सेदारी जरूरी है और इसे केवल छात्र संघ के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।
एसएफआई का आरोप है कि लंबे समय से चुनाव न कराने से छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार कमजोर हो रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि फीस वृद्धि वापस न ली गई, समय-सारणी में बदलाव न हुआ और चुनाव बहाल न किए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।