Bengaluru News: बेंगलुरु में आयोजित संयुक्त समन्वय समिति (JCC) की तीसरी त्रैमासिक बैठक में केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों ने मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने की रणनीति बनाई। बैठक में एटोमिडेट तस्करी के नए तौर-तरीकों, छात्रों के बैंक खातों के कथित दुरुपयोग और वर्ष 2026-2029 के ड्रग कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट को लागू करने पर सहमति बनी।
मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी और तस्करों के बदलते तरीकों पर सख्त कार्रवाई के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर की जांच एजेंसियों ने एकजुट होकर रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में कर्नाटक की तीसरी त्रैमासिक राज्य स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (JCC) की बैठक बेंगलुरु में आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करना और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत बनाना है।
बैठक में शामिल प्रमुख जांच एजेंसियां
बैठक की अध्यक्षता स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र के उप महानिदेशक ने की। इस उच्चस्तरीय समन्वय बैठक में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई), केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, सीमा शुल्क विभाग (कस्टम्स), आयकर विभाग, खुफिया ब्यूरो (आईबी), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), राज्य एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और कर्नाटक पुलिस के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में एटोमिडेट की बढ़ती तस्करी के नए रुझानों, राज्य एएनटीएफ की क्षमता बढ़ाने और जेसीसी द्वारा अग्रसारित मामलों में ईडी द्वारा की जा रही वित्तीय जांच पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही एनडीपीएस मामलों में ‘पीआईटीएनडीपीएस’ कानून के तहत तस्करों की निवारक हिरासत की कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।
हवाला लेनदेन और छात्रों के खातों के दुरुपयोग का मामला
बैठक के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ट्रेनों के जरिए गांजा तस्करी से जुड़े दस्तावेज और मामले साझा किए। वहीं राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने अवैध वित्तीय लेन-देन, गुप्त माध्यमों से धन के ट्रांसफर और हवाला नेटवर्क पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। डीआरआई ने यह चिंताजनक तथ्य भी सामने रखा कि कुछ मामलों में अफ्रीकी नागरिकों द्वारा कॉलेज छात्रों के बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन के लिए किए जाने के संकेत मिले हैं।
सभी एजेंसियों ने मादक पदार्थ नियंत्रण दृष्टि दस्तावेज (2026-2029) को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू करने की रूपरेखा पर सहमति जताई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सिंडिकेट पर नकेल कसने के लिए नियमित रूप से खुफिया सूचनाएं साझा करने और संयुक्त कार्रवाई जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।