Gandhinagar News: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने गुजरात के एक पीड़ित से 11.4 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पीड़ित को शातिरों ने करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर यह भारी भरकम रकम ऐंठी थी। आरोपियों ने खुद को पुलिस और ट्राई का वरिष्ठ अधिकारी बताकर डराया-धमकाया और बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए थे। यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
ऑपरेशन चक्र-6 के तहत 10 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी
सीबीआई ने संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क को तोड़ने के लिए ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ चलाया। इसके तहत देश के 10 राज्यों में स्थित 22 ठिकानों पर एक साथ व्यापक छापेमारी की गई। इसी सघन तलाशी अभियान के दौरान दोनों मुख्य आरोपियों हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास को धर दबोचा गया।
जांच में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी ठगी की रकम को विभिन्न बैंक खातों में घुमाने और बांटने का काम करते थे। इन्होंने हेक्साक्वेस्ट ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के खाते के जरिए करीब 2.5 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की, ताकि जांच एजेंसियों को वित्तीय लेन-देन की भनक न लगे।
फॉरेंसिक जांच में खतरनाक एपीके फाइलों और म्यूल खातों का खुलासा
सीबीआई द्वारा जब्त डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोपी फर्जी म्यूल खातों को संचालित करने और पैसे निकालने के लिए खतरनाक एपीके फाइलों का उपयोग करते थे। इनके फोन और कंप्यूटर से भारी मात्रा में संदिग्ध डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
जांच एजेंसी ने आरोपियों के पास से आपत्तिजनक चैट, बैंकिंग दस्तावेज और फर्जी बैंक खातों के विस्तृत रिकॉर्ड बरामद किए हैं। सीबीआई अब इन सुरागों के आधार पर पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के तकनीकी नेटवर्क को खंगालने और गिरोह के बाकी फरार सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।