Kullu News: कुल्लू और मंडी जिले की सीमा पर स्थित धार क्षेत्र में ऐतिहासिक धारा रा काहिका उत्सव आयोजित हुआ। उत्सव में माता फुंगणी ने देव स्थलों पर बढ़ती इंसानी दखलंदाजी पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि पवित्र स्थानों को पर्यटन स्थल का रूप न दिया जाए, वरना गंभीर परिणाम होंगे।
सावन महीने में आयोजित इस पारंपरिक काहिका मेले के दौरान माता फुंगणी ने गुर के माध्यम से अपनी भविष्यवाणी की। उत्सव में मौजूद माता के कारदार राम लाल ठाकुर ने बताया कि देवी-देवताओं के प्राचीन और पवित्र स्थलों से लगातार हो रही छेड़छाड़ और उनकी अवमानना से माता बेहद नाराज हैं।
जोत पर छोड़ी गई गाय और भैंसों को तुरंत वापस बुलाएं
माता फुंगणी ने अपनी भविष्यवाणी में श्रद्धालुओं को सख्त आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पवित्र पहाड़ी चोटियों और जोत पर अपनी गायों व भैंसों को खुला छोड़ रखा है, वे उन्हें तुरंत वापस ले आएं। आदेश का पालन न करना पूरे समाज और मानव जाति के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
उत्सव के दौरान माता ने स्पष्ट संदेश दिया कि हमारी सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत तभी सुरक्षित रह सकती है, जब इन प्राचीन स्थानों से इंसानी दखल बंद होगी। अगर लोग देव नीति के अनुसार अपना जीवन जिएंगे तो क्षेत्र में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहेगी।
देव समाज में सावन के महीने में आयोजित होने वाले धारा रा काहिका उत्सव का बहुत बड़ा महत्व है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले इस स्थान पर काहिका उत्सव मनाया जाता है। इसके पूरा होने के बाद ही कुल्लू की लगघाटी और मंडी के अलग-अलग क्षेत्रों में काहिका का आयोजन शुरू होता है।
इस वर्ष आयोजित हुए धार्मिक अनुष्ठान में कई देवी-देवताओं के कारकूनों ने पूरे विधि-विधान से देव आदेशों का पालन किया। इसमें माता फुंगणी, देवता पंचाली नारायण और दलीघाट की माता शामिल रहीं। इस पवित्र देव-काज को पंडित अतुल शर्मा, कुबेर शर्मा और कालू राम नड़ ने मुख्य रूप से संपन्न कराया।