New Delhi News: आजादी के 79 सालों के सफर में भारत ने गंभीर भुखमरी और बदहाल अर्थव्यवस्था से उबरकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने का गौरव हासिल किया है। वर्ष 1947 में मात्र 18 फीसदी साक्षरता और 32 वर्ष की औसत आयु से शुरू हुआ देश आज 77 प्रतिशत साक्षरता दर छू चुका है।
भारत अब 150 से अधिक देशों को खाद्यान्न और कृषि उत्पादों का निर्यात कर रहा है। देश का खाद्यान्न उत्पादन 1947 के 50 मिलियन टन से बढ़कर 330 मिलियन टन पर पहुंच गया है। हालांकि, उत्पादन में भारी वृद्धि के बावजूद किसानों की आमदनी उसी अनुपात में बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों की आवश्यकता है।
विदेशी मुद्रा भंडार और प्रति व्यक्ति आय में भारी इजाफा
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1947 के 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में 707 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इस दौरान प्रति व्यक्ति आय 250 रुपये से बढ़कर 2,19,575 रुपये वार्षिक हो गई है। हालांकि, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल के दबाव के बीच आय में और तेज वृद्धि जरूरी है।
बजट विस्तार के साथ रक्षा और वैश्विक निर्यात की चुनौतियां
केंद्रीय बजट 1947 के 197 करोड़ रुपये से बढ़कर 53.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि रक्षा खर्च 87.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद देश की विकास दर में भारी तेजी आई। लेकिन वैश्विक निर्यात में 1.8 प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत करना होगा।