Shimla News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका पेश किया है। इसमें साल 2032 तक राज्य को आत्मनिर्भर और देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य है। सरकार का प्रमुख उद्देश्य 2030 तक हिमाचल को स्वास्थ्य सेवाओं में देश का अग्रणी राज्य बनाना है।
शिमला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार केवल सत्ता पर नहीं, बल्कि प्रणालीगत परिवर्तन पर ध्यान दे रही है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा में बड़े सुधार शामिल हैं। भारी कर्ज और देनदारियों के बावजूद प्रदेश सरकार नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है।
<h2>स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा निवेश और तकनीकी सुधार</h2>
स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने भारी निवेश किया है। मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ का स्तर 35 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है। सरकार का लक्ष्य 2027 तक इसे 70 प्रतिशत करने का है। लगभग 1,000 स्टाफ नर्सों की भर्ती हो चुकी है और आईजीएमसी शिमला में एक्स-रे, सीटी व एमआरआई जैसी आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं।
राज्य में रोबोटिक सर्जरी भी शुरू की गई है, जिससे मरीजों को बहुत कम खर्च पर बेहतर इलाज मिल रहा है। इसके साथ ही स्नातकोत्तर मेडिकल सीटों में 320 की बढ़ोतरी हुई है और सीनियर रेजिडेंट का वजीफा 1.30 लाख रुपये कर दिया गया है। करीब 28 से 30 करोड़ रुपये के निवेश से ऑटोमेटेड लैब बनाने की भी योजना है।
वित्तीय चुनौतियों के बावजूद सरकार राजस्व बढ़ाने और अनुशासन बनाए रखने पर काम कर रही है। वाइल्डफ्लावर हॉल मामले में 401 करोड़ रुपये की वसूली और शराब ठेका नीलामी से आय बढ़ी है। ओपीएस प्राथमिकता बना हुआ है और कर्मचारियों को 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। सरकार का अंतिम लक्ष्य आत्मनिर्भर हिमाचल का निर्माण करना है।