हिमाचल हाई कोर्ट ने सीनियर लैब तकनीशियनों को पंजाब के समान वेतनमान देने की मांग वाली याचिका की खारिज, कही बड़ी बात

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के सीनियर लैबोरेटरी तकनीशियनों को पंजाब के समान संशोधित वेतनमान देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी राज्य सरकार दूसरे राज्य के वेतनमान या नियमों को अपनाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर अपील को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। यह याचिका 53 कर्मचारियों ने एकलपीठ के पुराने फैसले के खिलाफ दायर की थी, जिसने उनकी इस मांग को पहले ही नामंजूर कर दिया था।

मूल रूप से 60 रिट याचिकाकर्ताओं में से 53 कर्मचारियों ने यह अपील दायर की थी। उनकी मुख्य मांग थी कि पंजाब राज्य के सीनियर लैब तकनीशियनों की तर्ज पर उन्हें 1978 से संशोधित वेतनमान मिले। इसके अलावा 1 जनवरी 2006 से लागू परिवर्तन तालिका के तहत 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मांगा था।

राज्य सरकार ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। सरकार का स्पष्ट रुख था कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत राज्य लोक सेवाओं पर उसका अपना विशेष अधिकार है। हिमाचल सरकार पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के फैसलों या पंजाब के वेतनमानों को लागू करने के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं है।

सरकार ने साल 2013 में एक अधिसूचना जारी करके सीनियर लैब तकनीशियनों का ग्रेड पे संशोधित कर 3,600 रुपये तय किया था। सरकार के अनुसार इस फैसले को तय तारीख से ही लागू माना जा सकता है, इसलिए कर्मचारियों की पंजाब के समान नया वेतनमान मांगने की दलील पूरी तरह निराधार है।

अदालत की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि वेतनमान तय करना पूरी तरह नीतिगत फैसला है। इसमें भर्ती प्रक्रिया, शैक्षणिक योग्यता, पदोन्नति के मौके, काम की प्रकृति और नियोक्ता यानी सरकार की वित्तीय क्षमता जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं।

हाई कोर्ट ने सहकारी विभाग के निरीक्षकों से जुड़े एक अन्य मामले का उदाहरण भी पेश किया। अदालत ने दोहराया कि कानूनन एक राज्य दूसरे राज्य द्वारा तय वेतनमान को अपनाने के लिए विवश नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने कर्मचारियों की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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