Mumbai News: टाटा संस के डायरेक्टर नोएल टाटा ने आगामी 26 नवंबर को होने वाली बोर्ड बैठक के लिए दो अहम प्रस्ताव पेश किए हैं। इनमें शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप को कैपिटल रिडक्शन के जरिए 25,000 करोड़ रुपये देने और टाटा संस को ऑपरेटिंग कंपनी में बदलकर आईपीओ लिस्टिंग से बचाने की योजना शामिल है। दोनों प्रस्तावों पर विचार के लिए विस्तृत कानूनी व वित्तीय रिपोर्ट मांगी गई है।
टाटा संस के भीतर कॉरपोरेट ढांचे और शेयरधारिता को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा शुरू हो गई है। कंपनी के डायरेक्टर नोएल टाटा ने दो अलग-अलग प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड के समक्ष विचार के लिए भेजे हैं। इनमें पहला प्रस्ताव टाटा संस के माइनॉरिटी शेयरधारक शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप को कैपिटल रिडक्शन के माध्यम से 25,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने से संबंधित है। वहीं, दूसरा प्रस्ताव टाटा ट्रस्ट्स की पुनर्गठन योजना है, जिसका उद्देश्य टाटा संस को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग की अनिवार्यता से बाहर रखना है।
नोएल टाटा ने 29 अक्टूबर को कंपनी सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर इन दोनों प्रस्तावों को 26 नवंबर 2026 को होने वाली बोर्ड बैठक में शामिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कंपनी प्रबंधन से इन योजनाओं से जुड़े वित्तीय प्रभाव, विधिक पहलुओं, विनियामक मंजूरियों, फंड प्रबंधन और इन्हें लागू करने की समयसीमा पर पूरी रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
कैपिटल रिडक्शन से एसपी ग्रुप को 25,000 करोड़ देने की रूपरेखा
टाटा संस में शापूरजी पालोनजी ग्रुप की लगभग 18.38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ग्रुप अपनी शेयरधारिता के एवज में 25,000 करोड़ रुपये की मांग कर रहा है। इसके लिए कैपिटल रिडक्शन (शेयर पूंजी में कमी) का फॉर्मूला प्रस्तावित किया गया है।
इस योजना के तहत टाटा संस, एसपी ग्रुप के शेयरधारकों से शेयर वापस खरीदेगी और उन्हें रद्द कर देगी। इस 25,000 करोड़ रुपये की राशि को एकमुश्त देने के बजाय अगले 18 महीनों में दो या उससे अधिक किस्तों में चुकाने का विकल्प रखा गया है। शेयरों की उचित कीमत (फेयर मार्केट वैल्यू) तय करने के लिए किसी स्वतंत्र मर्चेंट बैंकर या रजिस्टर्ड वैल्यूअर की सेवाएं ली जाएंगी। नोएल टाटा ने प्रबंधन को योजना के कानूनी परीक्षण के बाद इसे बोर्ड में मतदान के लिए रखने को कहा है।
टाटा ट्रस्ट्स का पुनर्गठन प्रस्ताव: ऑपरेटिंग कंपनी में बदलने की तैयारी
नोएल टाटा द्वारा भेजे गए दूसरे प्रस्ताव की जड़ें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के 28 सितंबर के सुझाव से जुड़ी हैं। इन दोनों ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस पुनर्गठन योजना के तहत समूह की दो कंपनियों—टाटा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स सॉल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का विलय टाटा संस में करने का प्रस्ताव है।
इस विलय का मुख्य उद्देश्य टाटा संस को केवल एक होल्डिंग कंपनी के बजाय सीधे व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने वाली ‘ऑपरेटिंग कंपनी’ बनाना है। इससे कंपनी खुद का कारोबार भी करेगी और साथ ही समूह की अन्य कंपनियों की होल्डिंग फर्म के तौर पर भी कार्य करती रहेगी। ट्रस्ट्स का तर्क है कि इस बदलाव से कंपनी की कानूनी और विनियामक स्थिति बदल जाएगी।
आरबीआई के एनबीएफसी नियमों से बचने की कवायद
यह पूरा मामला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों से जुड़ा है। आरबीआई ने टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया है। नियमों के मुताबिक, इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) होना अनिवार्य होता है। टाटा संस ने पहले केंद्रीय बैंक से कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) का दर्जा वापस लेने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया।
टाटा ट्रस्ट्स का आकलन है कि दोनों ऑपरेटिंग कंपनियों के विलय के बाद टाटा संस की कुल आय में कारोबारी राजस्व की हिस्सेदारी काफी बढ़ जाएगी। 31 मार्च 2026 तक के वित्तीय अनुमानों के आधार पर प्रस्तावित नई इकाई का ऑपरेटिंग राजस्व 1.05 लाख करोड़ रुपये और वित्तीय परिसंपत्तियों से होने वाली आय 40,072 करोड़ रुपये रह सकती है। इससे कुल आय में ऑपरेटिंग कारोबार की हिस्सेदारी 64.3 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे कंपनी अपर-लेयर एनबीएफसी के लिस्टिंग नियमों के दायरे से बाहर आ सकती है।
26 नवंबर की बोर्ड बैठक पर टिकी निगाहें
टाटा संस के बोर्ड की 26 नवंबर को प्रस्तावित बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पूर्व 17 सितंबर की बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार और कंपनी की संभावित लिस्टिंग को लेकर मतभेद देखे गए थे, जहां नोएल टाटा ने असहमति जताई थी। अब एसपी ग्रुप के भुगतान और पुनर्गठन योजना पर बोर्ड के रुख पर सभी पक्षों की नजरें हैं। हालांकि, इन दोनों ही प्रस्तावों पर अभी बोर्ड की अंतिम मुहर लगनी शेष है।