Lucknow News: चक्रवात अर्नब के प्रभाव से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है। बेमौसम बरसात के कारण प्रदेश में धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। पिछले 24 घंटों में बिजनौर में सर्वाधिक 10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।
चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के चलते उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले दिनों में भी चक्रवात का प्रभाव बना रह सकता है, जिससे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और भारी बारिश होने की संभावना है। बेमौसम हो रही इस बारिश और तेज आंधी के कारण खेतों में तैयार खड़ी धान की फसलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान बिजनौर जिले में सबसे अधिक 10 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, दोनों संभागों में मौसम की स्थिति इस प्रकार रहने का अनुमान है:
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश: पश्चिमी संभाग के जिलों में 30 और 31 अक्टूबर के दौरान छिटपुट स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। इसके बाद 1 नवंबर से मौसम के सामान्य और शुष्क होने का पूर्वानुमान है।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश: पूर्वी संभाग में 31 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच कई स्थानों पर रुक-रुक कर छिटपुट वर्षा होने के आसार हैं। इस क्षेत्र में 3 नवंबर से मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
धान की पकी फसल को नुकसान, प्रशासन ने जारी की सुरक्षा सलाह
खेतों में धान की फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी है, ऐसे में तेज हवाओं के साथ हो रही भारी बारिश के चलते फसल के बिछने और जलभराव से दाना खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
प्रतिकूल मौसम को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों और किसानों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी किया है। प्रशासन ने अपील की है कि तेज हवाओं और आकाशीय बिजली की स्थिति में खुले स्थानों, पेड़ों, कच्चे ढांचों और बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें तथा सुरक्षित पक्के भवनों में ही रहें।