Ranchi News: झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में गड़बड़ी का मामला अब उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगन ने इस परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में सीबीआई या किसी स्वतंत्र समिति से जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने इस विवादित प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने का आग्रह किया है। इसके अलावा किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति बनाने की मांग भी की गई है। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा से जुड़े आरोपों की समयबद्ध तरीके से निष्पक्ष जांच पूरी करना है।
मूल्यांकन और ओएमआर शीट के ऑडिट की मांग
दाखिल याचिका में केवल परीक्षा रद्द करने की बात नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। इसमें ओएमआर शीट की स्कैनिंग, कोडिंग और रिजल्ट तैयार करने की जांच शामिल है। याचिका का मकसद सही और गलत तरीके से पास हुए अभ्यर्थियों की पहचान करना है।
यह पूरा विवाद एक उम्मीदवार की ओएमआर कार्बन कॉपी वायरल होने के बाद शुरू हुआ। आरोप है कि अभ्यर्थी ने केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, फिर भी उसका नाम पास होने वालों की सूची में आ गया। हालांकि, इस मामले की अंतिम पुष्टि न्यायिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
डिजिटल और कागजी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अपील
आरोपों के बीच जेपीएससी ने सफल अभ्यर्थियों से पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर कार्बन कॉपी मांगी है। उधर, याचिका में परीक्षा से जुड़े सभी कागजी और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश देने की गुहार लगाई गई है। इनमें सीसीटीवी फुटेज, बायोमेट्रिक डेटा और अटेंडेंस शीट मुख्य रूप से शामिल हैं।
दूसरी तरफ रांची में छात्रों का बड़ा आंदोलन जारी है। अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि यह मामला हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है, जिन्होंने सालों तक इसके लिए कड़ी मेहनत की है।