Mumbai News: सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने टाटा संस के नए चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है। वर्तमान चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद पर न बने रहने का फैसला किया है।
ट्रस्ट को 12 अगस्त को एन. चंद्रशेखरन का ईमेल मिला था, जिसमें उन्होंने दोबारा नियुक्ति न लेने के अपने फैसले के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद ट्रस्टियों ने टाटा संस के ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ के तहत एक सेलेक्शन कमेटी बनाने का प्रस्ताव पास किया, जो नए चेयरमैन की सिफारिश करेगी।
इस कदम से टाटा संस में उत्तराधिकार की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। महीनों से चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। ट्रस्ट ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए समूह में उनके उत्कृष्ट योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए उनका धन्यवाद जताया है।
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि नेतृत्व में बदलाव के इस दौर में वह टाटा संस को पूरा समर्थन देगा। समूह के मूल्यों और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए, टाटा संस में समय पर और व्यवस्थित तरीके से नए प्रमुख का चयन सुनिश्चित किया जाएगा।
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन का यह फैसला पांच साल के कार्यकाल विस्तार पर आम सहमति न बन पाने के कारण आया है। हालांकि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी।
इसके बाद टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। 24 फरवरी को बोर्ड बैठक के दौरान एक सदस्य के समर्थन न करने की वजह से प्रस्ताव अटक गया। आम सहमति न होने के कारण चंद्रशेखरन ने इस प्रक्रिया को टाल दिया।
छह महीने बाद भी सहमति न बनने पर चंद्रशेखरन ने बोर्ड से नया लीडर चुनने का आग्रह किया। उनका मानना है कि कंपनी में कई बड़े प्रोजेक्ट्स जारी हैं। ऐसे में कर्मचारियों, निवेशकों और पार्टनर्स के बीच नेतृत्व को लेकर पूरी स्पष्टता होना बेहद जरूरी है।
यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब टाटा ग्रुप एविएशन, सेमीकंडक्टर और डिजिटल बिजनेस जैसे सेक्टर्स में बड़ा निवेश कर रहा है। नए चेयरमैन को एयर इंडिया, जगुआर लैंड रोवर और टीसीएस जैसे प्रमुख बिजनेस को नए दौर में आगे ले जाने की बड़ी जिम्मेदारी संभालनी होगी।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच गवर्नेंस के मुद्दों को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी है। इस वजह से नए चेयरमैन के चयन पर पूरी इंडस्ट्री की नजरें टिकी हुई हैं।
वित्त वर्ष 2026 में टाटा ग्रुप का कुल रेवेन्यू 13.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में समूह के मार्केट कैप और मुनाफे में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। चंद्रशेखरन 20 फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे, तब तक नए उत्तराधिकारी की तलाश पूरी कर ली जाएगी।