Delhi News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई की शाम प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर किया। प्रह्लाद जोशी अब अपने मौजूदा विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय भी संभालेंगे।
प्रह्लाद जोशी कर्नाटक की धारवाड़ सीट से सांसद हैं। वह केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
NEET परीक्षा विवाद के कारण दिया पद से इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर दो पन्नों का इस्तीफा पत्र साझा किया। उन्होंने लिखा कि उनका पूरा जीवन छात्रों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि 3 मई 2026 की नीट परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत मिलते ही जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सरकार ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला भी लिया था।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने आगे लिखा कि अगले साल से नीट परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाने का फैसला हुआ है। उनके लिए किसी भी पद से ज्यादा देश के युवाओं का भविष्य मायने रखता है। वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य राजनीतिक या कानूनी विवादों में फंसे, इसलिए उन्होंने तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम
नीट परीक्षा में धांधली को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन काफी समय से चल रहा था। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से इस आंदोलन को बड़ा समर्थन मिला। 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद माहौल काफी गरम हो गया था।
विरोध प्रदर्शनों के वीडियो वायरल होने के बाद देश के कई राज्यों में प्रदर्शन तेज हो गए थे। दबाव बढ़ता देखकर शुक्रवार रात सरकार ने एनटीए के 47 अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। इसके ठीक अगले ही दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।