Patna News: बिहार विधानसभा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की पेश रिपोर्ट में ग्रामीण कार्य और जल संसाधन विभाग की गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। पूर्वी चंपारण और अररिया जिले में बिना संपर्क पथ के ही पुलों का निर्माण कर दिया गया।
इन दोनों अनुपयोगी पुलों के निर्माण पर सरकारी खजाने के 3 करोड़ 30 लाख रुपये बर्बाद हो गए। भूमि अधिग्रहण किए बिना ही टेंडर जारी करने और निर्माण कराने के कारण सालों बीत जाने के बाद भी स्थानीय जनता को इन पुलों का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पूर्वी चंपारण और अररिया में बेकार पड़े करोड़ों के पुल
पूर्वी चंपारण के बेतौना गांव में निर्मित पुल के लिए दोनों तरफ संपर्क सड़क का निर्माण होना था। जमीन अधिग्रहण का ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने के कारण वर्ष 2018 में बना पुल आठ साल बाद भी पूरी तरह बेकार पड़ा हुआ है।
वहीं, अररिया के थापकोल में भी 80 फीसदी बने पुल का उपयोग छह साल बाद भी शुरू नहीं हो सका। सीएजी ने इस लापरवाही के लिए विभागीय अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। जुलाई 1986 के कैबिनेट नियमों का उल्लंघन कर बिना जमीन उपलब्धता के टेंडर बांटे गए।
तटबंध निर्माण में 248 करोड़ डूबे, नल-जल योजना से मिल रहा दूषित पानी
बागमती, कमला-बलान और महानंदा नदी बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण के बिना ही टेंडर दे दिए गए। जमीन नहीं मिलने के कारण 247 करोड़ 80 लाख रुपये आधे-अधूरे तटबंधों में डूब गए और 16 साल बाद भी लोगों को बाढ़ से राहत नहीं मिली।
सीएजी की जांच में ‘हर घर नल का जल’ योजना में भी बड़े पैमाने पर खामियां पाई गईं। जल शोधन की सही व्यवस्था न होने के कारण कई वार्डों के 1 लाख 17 हजार से अधिक लोग आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।