Dhaka News: बांग्लादेश में आगामी सर्दियों के दौरान महंगाई और खाद्य संकट और गहराने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में उछाल और कृषि लागत बढ़ने से खाद्यान्न महंगे हो सकते हैं। अर्थशास्त्रियों ने कमजोर वर्गों को राहत देने के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तत्काल सुधार की मांग की है।
बांग्लादेश में आगामी सर्दियों के मौसम में महंगाई का नया दौर शुरू होने की आशंका जताई गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और कृषि उत्पादन की लागत बढ़ने के कारण खाद्य पदार्थों के दामों में तेजी आ सकती है। बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ की एक रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों के हवाले से कहा गया है कि सरकार को कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आर्थिक झटकों से बचाने के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा और बाजार प्रबंधन में आवश्यक सुधार लाने होंगे।
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि जो परिवार आधिकारिक गरीबी रेखा के दायरे में दर्ज नहीं हैं, वे भी इस गंभीर आर्थिक दबाव की चपेट में आ सकते हैं। जीवनयापन की बढ़ती लागत के चलते कई परिवारों को दैनिक खर्च चलाने के लिए आभूषण व घरेलू संपत्तियां बेचने अथवा भारी कर्ज लेने पर विवश होना पड़ सकता है।
कृषि लागत दोगुनी होने और ग्रामीण कर्ज पर चिंता
नागरिक समाज के एक मंच द्वारा आयोजित परिचर्चा में बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (बीआईडीएस) के महानिदेशक एकेएम इनामुल हक ने कहा कि नीति निर्माताओं को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि अर्थव्यवस्था जल्द सामान्य हो जाएगी। उन्होंने आगे की प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए तैयार रहने पर जोर दिया।
हक के अनुसार, ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण उर्वरक, कीटनाशक और कृषि से जुड़ी आवश्यक सामग्री महंगी हो गई हैं, जिससे खेती की कुल लागत लगभग दोगुनी हो चुकी है। इसका सीधा असर फसलों के उत्पादन और खाद्य वस्तुओं के बाजार भाव पर पड़ना तय है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी आय की अनिश्चितता को देखते हुए सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली (पीडीएस) की समीक्षा करने का सुझाव दिया।
आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज का स्तर 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि महानगरों में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत और अन्य शहरी इलाकों में 40 प्रतिशत दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि नीतियों का केंद्र केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहा, तो ग्रामीण आबादी की वित्तीय परेशानियों का समाधान संभव नहीं होगा।
न्यूनतम वेतन का विस्तार और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की मांग
ढाका विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की प्रोफेसर सायमा हक बिदिशा ने कहा कि यदि आर्थिक विकास समावेशी नहीं होगा और सामाजिक असमानता को कम नहीं करेगा, तो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन हो जाएगा। उन्होंने अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए भी न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग की और कहा कि इसका दायरा केवल कपड़ा उद्योग तक सीमित न रखकर अन्य सभी क्षेत्रों के श्रमिकों तक बढ़ाया जाना चाहिए।
आर्थिक वृद्धि में गिरावट और बढ़ता व्यापार घाटा
एक अन्य आर्थिक रिपोर्ट में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के समक्ष तीन बड़ी चुनौतियों—धीमी विकास दर, बढ़ता व्यापार घाटा और बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय कमजोरियों को रेखांकित किया गया है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 3.4 प्रतिशत रह गई थी। वित्त वर्ष 2026-27 में भी विकास दर के इसी स्तर के आसपास रहने का अनुमान है, जो सरकार के निर्धारित 6.5 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से काफी नीचे है।