Kasauli News: शिक्षाविद और सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि जे आंग्मो ने कहा है कि हर उठने वाली आवाज को अपना विरोध समझकर दबाना सही नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार और प्रशासन को आंदोलनों व विरोधों के कारणों का पता लगाकर उनका समाधान करना चाहिए। कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान यह बात सामने आई।
कसौली क्लब में आयोजित खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान ‘द आर्ट ऑफ डिसएग्रीमेंट’ सत्र में सुनेत्रा चौधरी के साथ बातचीत करते हुए डॉ. गीतांजलि ने स्पष्ट किया कि वह और सोनम वांगचुक सीजेपी के संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक बदलाव लाने के लिए केवल किसी मंत्री के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लिए गंभीर शैक्षिक व सामाजिक सुधारों की आवश्यकता है।
लद्दाख को बचाना भारत को बचाने जैसा
ऑनलाइन सत्र में जुड़े पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख को बचाना असल में भारत को बचाने जैसा है। इस दौरान पर्यावरणविद् डॉ. रवि चोपड़ा और पूर्व आईएएस अधिकारी अवय शुक्ला ने हिमालय क्षेत्र में लगातार बिगड़ रहे पारिस्थितिक संकट के प्रति गहरी चिंता जताई और आगाह किया। लिटफेस्ट के दूसरे दिन शनिवार को विभिन्न ज्वलंत विषयों पर दस से अधिक सत्र आयोजित किए गए।
पर्यावरण संरक्षण और अन्य सत्रों के मुख्य बिंदु
‘डिस्ट्रोपिया इन एन एआइ वर्ल्ड’ सत्र में मंदिरा शाह ने छात्रों को इस बात पर विचार करने के लिए प्रेरित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का रचनात्मकता, निजता और स्वतंत्र सोच पर क्या गहरा प्रभाव पड़ सकता है। एक अन्य सत्र में पर्यावरण पत्रकार बहार दत्त और लेखिका निखिता सिंह ने पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली और संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके अलावा ‘इट्स टीन टाइम, ब्रो’ सत्र में लेखिका पूजा पोद्दार मारवाह ने शाइनी एंटनी के साथ चर्चा करते हुए माता-पिता और किशोर बच्चों के बीच होने वाले आपसी टकरावों पर बात की। इस महोत्सव ने कसौली के बौद्धिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को बेहद समृद्ध किया है।