Dharamshala News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत हिमाचल प्रदेश के स्कूली छात्रों के मूल्यांकन की व्यवस्था बदलने वाली है। अब बच्चों का आकलन सिर्फ परीक्षा के अंकों से नहीं होगा। उनकी रचनात्मकता, जीवन कौशल और नैतिक मूल्यों के आधार पर प्रतिभा आंकी जाएगी। इसके लिए राज्य में जल्द ‘डिजिटल होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड’ लागू होगा।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी में जुटा है। बोर्ड का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल गुजरात के गांधीनगर से दो दिवसीय मंथन के बाद लौटा है। इस दल ने वहां अन्य राज्यों के बोर्ड्स की बेहतरीन कार्यप्रणालियों और मूल्यांकन की आधुनिक तकनीकों का गहन अध्ययन किया।
शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने गांधीनगर के ‘स्कूल ऑफ अचीवर्स’ में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लिया। इस दल में अतिरिक्त सचिव डॉ. अंबिका जोशी, सहायक सचिव विपन कुमार और शैक्षणिक अधिकारी डिम्पल कंवर शामिल थीं। टीम ने डिजिटल मूल्यांकन और शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े नवाचार सीखे।
डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि ‘डिजिटल होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड’ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा। यह छात्रों के 360 डिग्री समग्र विकास को मापने का जरिया बनेगा। इसके माध्यम से बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके हुनर, रचनात्मक सोच, संवाद क्षमता और अन्य गतिविधियों का सटीक मूल्यांकन संभव होगा। इससे वास्तविक सीख का पता चलेगा।
गांधीनगर में सीखी गई बेहतरीन तकनीकों को अब हिमाचल के स्कूलों में लागू करेंगे। बोर्ड अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि इससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को पारदर्शी व भरोसेमंद सिस्टम मिलेगा। यह पहल राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को पूरा करने और स्कूली शिक्षा को तकनीक से जोड़ने में बेहद मददगार साबित होगी।