टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के मतभेदों पर वित्त मंत्री की दो टूक, कहा- बंद कमरों में सुलझाएं विवाद, अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

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National News: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा समूह के नेतृत्व से अपने आंतरिक मतभेद बंद दरवाजों के पीछे सुलझाने का आग्रह किया है। मुंबई में बयान देते हुए उन्होंने कहा कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच का विवाद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, जिसे सार्वजनिक टकराव बनने से रोका जाना चाहिए।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व को आपसी विवाद बातचीत के जरिए हल करने की सलाह दी है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि टाटा संस और उसके सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच का टकराव अत्यंत नाजुक मामला है। भारतीय अर्थव्यवस्था में समूह के व्यापक प्रभाव को देखते हुए इस विवाद को सार्वजनिक मंच पर आने देने के बजाय परिपक्वता और व्यावसायिक सूझबूझ के साथ आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए।

‘अर्थव्यवस्था के लिए अहम है टाटा समूह, तुरंत सामान्य हों हालात’

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि क्या सरकार इसमें सीधा हस्तक्षेप करेगी या नहीं, इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने जोर दिया कि मामलों को सुलझाने के लिए व्यावसायिक सूझ-बूझ और आपसी सौहार्द की आवश्यकता है।

वित्त मंत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि ये बहुत ही नाजुक मामले हैं और इनमें काफी व्यावसायिक सूझ-बूझ की जरूरत होगी। टाटा की ब्रांड वैल्यू और इसे वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में पारसी समुदाय के योगदान को सभी जानते हैं। टाटा समूह अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय है, इसलिए इसे सार्वजनिक टकराव का मुद्दा बनने देने के बजाय नेतृत्व को आपस में बैठकर स्थिति को जल्द सामान्य करना चाहिए।”

लिस्टिंग और चेयरमैन पद को लेकर 17 सितंबर की बैठक में उभरे मतभेद

टाटा समूह के भीतर यह खींचतान चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व वाले टाटा संस और नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रही है। विवाद के दो मुख्य पहलू हैं: पहला टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग और दूसरा एन. चंद्रशेखरन का चेयरमैन बने रहना।

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर पंजीकरण रद्द करने की मांग खारिज किए जाने के बाद बोर्ड ने लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और चंद्रशेखरन को पुनः चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया। 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में नोएल टाटा अकेले ऐसे निदेशक थे जिन्होंने इन फैसलों के विरोध में मतदान किया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के दूसरे नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने बहुमत का साथ दिया।

ट्रस्टी डेरियस खंबाटा ने दोबारा पद स्वीकारने से किया इनकार

इस आंतरिक विवाद के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) में दोबारा ट्रस्टी बनने से इनकार कर दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल नौ नवंबर को समाप्त हो रहा है।

नोएल टाटा और मुख्य कार्यकारी सिद्धार्थ शर्मा को लिखे पत्र में खंबाटा ने कहा कि पद पर बने रहने की मांग से उनकी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने 17 सितंबर की बोर्ड बैठक की कार्यप्रणाली की तीखी आलोचना करते हुए उसे ‘कलंक का दिन’ बताया और कहा कि इस तरह के टकराव से टाटा संस की प्रतिष्ठा के साथ-साथ भारतीय उद्योग जगत की छवि को भी ठेस पहुंची है।

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