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दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के हालिया झटकों से घबराने की जरूरत नहीं: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र

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Edited By Naveen Kumar Pandey | पीटीआई | Updated:

इंडिया गेट (फाइल फोटो)
हाइलाइट्स

  • दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार कई बार भूकंप आए
  • राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने कहा है कि इन झटकों से घबराने की जरूरत नहीं है
  • केंद्र के निदेशक ने राज्यों को भी कुछ सुझाव दिए और नियमों का पालन करवाने को कहा

नई दिल्ली

लॉकडाउन में दिल्ली-एनसीआर में कई बार भूकंप के झकटे महसूस किए गए। इसे लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं। इस बीच राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने कहा है कि इन हालिया झटकों से घबराने की जरूरत नहीं है। नैशनल सेंटर फॉर सिस्मॉलजी के डायरेक्टर बीके बंसल ने कहा कि लोगों को भूकंप के झटकों के लिए तैयारी रखने और एहतियात बरतने की जरूरत है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की तरफ से बुलाई गई एक मीटिंग में ये बातें कहीं।

दिल्ली-एनसीआर में हल्के झटकों का इतिहास

बंसल ने कहा कि दिल्ली में भूकंप के इतिहास पर नजर डालें तो दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के हल्के झटके कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने इसके लिए गृह मंत्रालय के बयान का हवाला दिया। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे हालात में घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि रिस्क कम करने के लिए तैयारी रखने और हालात से निपटने के प्रति जागरूकता और समझदारी दिखाने की जरूरत है।

भूकंप का पूर्वानुमान संभव नहीं

उन्होंने स्पष्ट किया कि भूकंप किस इलाके में, कब आ सकता है, इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। बंसल ने कहा कि दुनिया में अब तक ऐसी कोई भरोसेमंद तकनीक नहीं है जिसके जरिए भविष्यवाणी की जा सके कि भूकंप किस जगह आएगा, कब आएगा और कितनी तीव्रता से आएगा।

इसे भी पढ़ें: बड़े भूकंप की वजह बन सकते हैं छोटे झटके



राज्य सरकारों को सुझाव

एनडीएमए ने राज्य सरकारों से अपील की है कि वो मकान बनाते वक्त कानूनी दिशा-निर्देशों का पालन करवाए ताकि भूकंप की स्थिति में जान-माल का नुकसान नहीं हो। उसने राज्य सरकारों से यह भी अपील की कि वो नियमों के परे जाकर मकानों में अतिरिक्त निर्माण पर भी रोक लगाए। साथ ही कहा कि हर राज्य में कमजोर ढांचों, खासकर आवासीय भवनों, दफ्तरों आदि की पहचान करे और उनकी मरम्मत सुनिश्चित करवाए। अगर उनमें अतिरिक्त निर्माण किया गया हो तो उसे तोड़कर हटाए। एनडीएमए ने कहा कि इस तरह के निजी भवनों की भी पहचान कर उनमें चरणबद्ध तरीके से काम होना चाहिए।

एनडीएमए ने राज्यों सरकारों को सलाह दी कि वो नियमित अंतराल पर मॉक एक्सरसाइज करवाते रहे और भूकंप के बाद त्वरित प्रतिक्रिया का एक मानक प्रक्रियाएं (SoPs) जारी करे। साथ ही, भूकंप आने पर क्या करें और क्या नहीं, इसको लेकर जनजागरूकता फैलाने की जरूरत है।

IIT कानपुर की स्टडी में जताई गई है बड़े भूकंप की आशंका

प्रधानमंत्री मोदी ने भी जताई चिंता

ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि दुनिया कोविड-19 महामारी से लड़ रही है जबकि भारत को एक साथ कई चुनौतियों से लड़ना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘भारत कोविड-19 संकट के साथ-साथ बाढ़, टिड्डी दल के हमले और भूकंप जैसी कई चुनौतियों से लड़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए हमें संकट को अवसर में बदलना होगा। जिन सामान का हमें आयात करना पड़ता है उनका देश में ही विनिर्माण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने होंगे।’ प्रधानमंत्री ने आपदा को अवसर में बदलने के देशवासियों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह महामारी देश के लिए ‘परिवर्तनकारी मोड़’ है।

दिल्‍ली में फिर आया भूकंप, पिछले दो महीने में 14वीं बार लगे झटके

इस वजह से दिल्ली-एनसीआर में लगातार भूकंप

दिल्ली-एनसीआर भूकंप की जोन 4 में है। यहां कुछ फॉल्ट लाइन हैं, जिसमें मुरादाबाद, पानीपत और सोहना शामिल हैं। इनमें 6.5 तीव्रता वाले भूकंप की क्षमता है, लेकिन यह कहा नहीं जा सकता कि यह भूकंप कब आएगा। 2014 में एनआईएस ने माइक्रो जोन स्टडी की थी। इसके मुताबिक राजधानी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा जोन-5 में है, जो भूकंप को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील है। इन हिस्सों में ज्यादा तैयारियां की जानी चाहिए। पुरानी बिल्डिंगों को भूकंप के लिए तैयार करने की जरूरत है। एनसीएस के हेड डॉ. जे एल गौतम के अनुसार, दो महीने में इतने भूकंप आमतौर पर नहीं आते, लेकिन ऐसा कहना ठीक नहीं है कि यह बड़े भूकंप की आहट हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, पिछले दो साल में दिल्ली रीजन में 64 भूकंप आए हैं, जिनकी तीव्रता 4 से 4.9 के बीच रही, वही 8 भूकंप की तीव्रता 5 या इससे अधिक रही।

130 साल में आए सात बड़े भूकंप

  • 130 साल में आए सात बड़े भूकंप

    IIT कानपुर में सिविल इंजिनियरिंग विभाग के प्रफेसर जावेद एन मलिक के अनुसार, उनके इस दावे का आधार यह है कि पिछले 500 साल में गंगा के मैदानी क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। उत्‍तराखंड के रामनगर में चल रही खुदाई में 1505 और 1803 में भूकंप के अवशेष मिले हैं। उन्‍होंने बताया कि 1885 से 2015 के बीच देश में सात बड़े भूकंप दर्ज किए गए हैं। इनमें तीन भूकंपों की तीव्रता 7.5 से 8.5 के बीच थी।

  • भारी तबाही मचा सकता है बड़ा भूकंप

    वाडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के चीफ डॉ कलाचंद जैन ने चेतावनी दी है कि NCR क्षेत्र में लगातार सीस्मिक ऐक्टिविटी हो रही है और इससे दिल्‍ली में एक बड़ा भूकंप आ सकता है। IIT जम्‍मू के प्रोफेसर चंदन घोष ने कहा कि अगर कोई बड़ा भूकंप इस इलाके में आया तो भयानक नतीजे होंगे।

  • भूकंप आया तो करीब 400 किलोमीटर का इलाका होगा प्रभावित

    किसी भी बड़े भूकंप का 300-400 किलोमीटर की रेंज तक दिखता है। 2001 में भुज में आए भूकंप ने करीब 300 किमी दूर अहमदाबाद में भी बड़े पैमाने पर तबाई मचाई थी। इसके अलावा, भूकंप की कम तीव्रता की तरंगें दूर तक असर कर बिल्डिंगों में कंपन पैदा कर देती हैं। गंगा के मैदानी क्षेत्रों की मुलायम मिट्टी इस कंपन के चलते धसक जाती है।

  • भूकंप न कर पाए नुकसान, सावधानी के लिए बना ऐटलस

    केंद्र सरकार के आदेश पर डिजिटल ऐक्टिव फॉल्ट मैप ऐटलस तैयार किया गया है। इसमें ऐक्टिव फॉल्टलाइन की पहचान के अलावा पुराने भूकंपों का रेकॉर्ड भी तैयार हुआ है। ऐटलस से लोगों को पता चलेगा कि वे भूकंप की फॉल्ट लाइन के कितना करीब हैं और नए निर्माण में सावधानियां बरती जाएंगी।

  • ऐटलस तैयार करते वक्‍त मिली नई जानकारी

    ऐटलस को तैयार करने के दौरान टीम ने उत्तराखंड के रामनगर में जमीन में गहरे गड्ढे खोदकर रिसर्च शुरू किया। जिम कॉर्बेट नैशनल पार्क से 5-6 किमी की रेंज में हुए इस अध्ययन में 1505 और 1803 में आए भूकंप के सबूत मिले। रामनगर जिस फॉल्ट लाइन पर बसा है, उसे कालाडुंगी फॉल्टलाइन नाम दिया गया है। प्रफेसर जावेद के अनुसार, 1803 का भूकंप छोटा था, लेकिन मुगलकाल के दौरान 1505 में आए भूकंप के बारे में कुछ तय नहीं हो सका है। जमीन की परतों की मदद से इसे निकटतम सीमा तक साबित करना बाकी है।

  • भूकंप से बदला था कोसी नदी का रूट

    सैटलाइट से मिली तस्वीरों के अध्ययन से यह भी पता चला है कि डबका नदी ने रामनगर में 4-5 बार अपना अपना ट्रैक बदला है। अगले किसी बड़े भूकंप में यह नदी कोसी में मिल जाएगी। बरेली की आंवला तहसील के अहिच्छत्र में 12वीं से लेकर 14वीं शताब्दी के बीच भूकंपों के अवशेष मिले हैं।

  • प्‍लेट्स की निगरानी के लिए GPS स्‍टेशन

    इंडियन और तिब्बती (यूरेशियन) प्लेटों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फॉल्टलाइनों के करीब 20 स्थायी जीपीएस स्टेशन लगाए गए हैं। भूकंप संभावित क्षेत्रों में सेस्मोमीटर भी लगाए जा सकते हैं।

हिमालय बेल्ट से दिल्ली-एनसीआर को खतरा

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रमुख डॉ. एके शुक्ला के अनुसार, राजधानी को हिमालय बेल्ट से काफी खतरा है, जहां 8 तीव्रता वाले भूकंप आने की क्षमता भी है। यहां पिछले कई साल में बड़ा भूकंप नहीं आया है। अगर हिमालयी बेल्ट में बड़ा भूकंप आता है, तो राजधानी पर इसका काफी असर पड़ेगा। उनके अनुसार, छोटे-छोटे भूकंप आने से यह साफ है कि इस समय दिल्ली की यह लोकल फॉल्ट एक्टिव हैं। इसे वार्निंग की तरह लेना चाहिए और अपनी तैयारियों को पूरा करना चाहिए।

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