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देश के अनेक हिस्सों में अलग-अलग समय पर आ सकता है कोरोना का पीक: पैनल

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Edited By Satyakam Abhishek | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

कोरोना मामलों में चीन से आगे निकला महाराष्ट्र
हाइलाइट्स

  • देश में कोरोना के हर रोज रेकॉर्ड केस सामने आ रहे हैं
  • इस बीच एक उच्च स्तरीय पैनल का मानना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग समय पर पीक पर हो सकता है कोरोना
  • भारत में कोरोना मरीजों की संख्या ढाई लाख के पार पहुंच चुकी है महाराष्ट्र और दिल्ली में कोरोना की रफ्तार काफी तेज हो गई है
  • महाराष्ट्र और दिल्ली में कोरोना की रफ्तार काफी तेज हो गई है

नई दिल्ली

अनलॉक-1 के बाद देश में कोरोना की रफ्तार तेज हो गई है। हर रोज रेकॉर्ड नंबर में नए केस सामने आ रहे हैं। इस बीच, हेल्थ पर बने 15वीं वित्त आयोग के उच्च स्तरीय पैनल का मानना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में कोविड-19 (Covid-19 cases in india) के केस अलग-अलग समय पर पीक पर हो सकता है। बता दें कि देश में कोरोना के मामले ढाई लाख के पार पहुंच चुके हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली में कोविड के मरीजों की बढ़ती तादाद टेंशन दे रही है।



पैनल दी सरकार को बड़ी सलाह
आयोग ने सलाह दी है कि राज्यों के बीच संसाधनों का बेहतर तालमेल हो ताकि हर राज्य में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। इस उच्च स्तरीय पैनल के संयोजक और एम्स दिल्ली के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि ऐसी मैकेनिजम की जरूरत है कि जरूरत पड़ने पर मानव संसाधन और उपकरणों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जरूरत के अनुसार पहुंचाया जा सके।

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कई राज्यों में अलग तरीके से फैल रही बीमारी

गुलेरिया ने कहा कि कुछ राज्य कोरोना केसों की बढ़ती संख्या से निपटने में सक्षम हो सकते हैं जबकि कुछ राज्यों के लिए यह चुनौती होगी। कोरोना के फैलने का विश्लेषण के आधार पर पैनल का मानना है कि यह महामारी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से फैल रही है। जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, बंगाल और दिल्ली में लगातार बड़ी संख्या में नए केस सामने आ रहे हैं।

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आंध्र, पंजाब में कमी पर नए मरीज मिलने जारी

हालांकि कुछ राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और केरल में कोरोना के केसों में थोड़ी कमी आई है लेकिन वहां अभी नए मरीजों का मिलना जारी है। 14 से 18 मई तक किए गए स्टडी के अनुसार रोजाना का ग्रोथ रेट करीब 5.1 फीसदी है।

बिना ​मास्क और ग्लब्स बाहर जाना खतरनाक

  • बिना ​मास्क और ग्लब्स बाहर जाना खतरनाक

    मेडिकल या किसी अन्य तरह की इमरजेंसी होने पर ही यात्रा करें या बाहर जाएं। अगर बेहद जरूरी काम नहीं है, तो कृपया घर में रहें क्योंकि यहां आप और आपका परिवार सबसे सुरक्षित रह सकते हैं। बाहर जाते समय मास्क लगाना और ग्लब्स पहनना न भूलें। इससे आप खुद को संक्रमण से बचा सकते हैं। ऐसे मास्क का उपयोग न करें, जिसके किनारों या नीचे से हवा आती हो। यानी आपके फेस और मास्क के बीच गैप नहीं होनी चाहिए। मास्क को बार-बार न छुएं।

  • स्कूटर/बाइक

    टू-वीलर से कहीं भी जाते समय मास्क जरूरी पहनें। मास्क के बाद हेलमेट पहनना तो जरूरी है ही। अगर टू-वीलर पर दो शख्स बैठे हैं तो दोनों को ही मास्क और हेलमेट पहनना चाहिए। सफर के दौरान एक-दूसरे से बात न करें। टू-वीलर चलाने वाले और पीछे बैठने वाले, दोनों के कपड़े ऐसे हों कि शरीर पूरा ढका रहे। साथ ही ग्लव्स भी पहनें। टू-वीलर में हैंड सैनिटाइजर और टिशू पेपर या कॉटन का साफ कपड़ा जरूर रखें। टू-वीलर को घर के अंदर ही पार्क करें।

  • ​अपनी कार

    अगर आप अपनी कार से ट्रैवलिंग करने जा रहे हैं तो बेहतर होगा कि उन्हीं लोगों को अपने साथ कार में बिठाएं जिनके साथ आप कम से कम पिछले 14 दिन से रह रहे हैं। ये आपके परिवार के सदस्य या दोस्त हो सकते हैं। साथ ही कोशिश करें कि 5 सीटर कार में 4 लोग ही बैठें। इससे सोशल डिस्टेंसिंग भी काफी हद तक बनी रहेगी। कार में सैनिटाइजर, साबुन और पानी भी जरूर रखें। भीड़-भाड़ वाले इलाके से गुजरते समय कार के शीशे ऊपर कर लें। कार को किसी जगह रोककर बाहर खाने-पीने से बचें।

  • ​बस-ट्रेन

    पब्लिक वीइकल जैसे बस या ट्रेन से सफर के दौरान सावधानी बहुत ज्यादा रखनी पड़ती है। भीड़ में सफर से बचें। बस या ट्रेन में सफर के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। घर से निकलते समय मास्क और ग्लव्स जरूर लगाएं। पैसे निकालने के लिए बार-बार जेब या पर्स में हाथ न डालें। कुछ पैसे एक ही जेब में रखें और उन्हीं को पहले खर्च करें। सफर के दौरान किसी भी व्यक्ति से बात करने से बचें।

  • फ्लाइट

    फ्लाइट में सफर के दौरान भी सावधानी जरूरी है। एयरपोर्ट पर भी काफी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वहां डेस्क, हैंडलबार, रेलिंग और स्वचालित सीढ़ियां जैसी काफी जगह होती हैं जिन्हें छूने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। एयरपोर्ट पर कोशिश करें कि भीड़ से दूर रहें और सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें। सैनिटाइजर साथ रखें और एयरपोर्ट पर कुछ भी छूने के बाद हाथ सैनिटाइज करें। अपनी सीट पर बैठते समय हमेशा फेस मास्क और फेस शील्ड लगाकर रखें। अगर आपके पास बैठे यात्री को खांसी या जुकाम है या वह छींकता है तो ड्रॉपलेट्स आप तक नहीं आ पाएंगे। फ्लाइट पर चढ़ते समय उसके दरवाजे को भी न छूएं। साथ ही मील ट्रे को भी छूने से बचें।

  • कैब या टैक्सी

    कैब या टैक्सी में सफर करते समय भी कोरोना वायरस से बचने के लिए सावधानी जरूरी है। कैब या टैक्सी में राइड शेयर न करें। अकेले सफर करें। मास्क जरूर लगाएं और ग्लव्स भी पहनें। साथ में हैंड सैनिटाइजर रखें। गाड़ी के अंदर किसी हिस्से को छुएं और न ही अपने आंख, नाक, कान आदि को।कैब या टैक्सी का पेमेंट डिजिटल तरीके से करें। डिजिटल पेमेंट संभव न हो तो खुले पैसे जरूर रखें और जितना किराया बनता है, उतने पैसे दें। अगर ड्राइवर कुछ खुले पैसे दे तो उन्हें किसी कागज में लपेटकर अलग से रख लें। इन पैसों का तीन दिन बाद इस्तेमाल करें।

  • ​लिफ्ट में सावधानी

    लिफ्ट खाली हो तभी इस्तेमाल करें। हमेशा एक एक्स्ट्रा पेन साथ में रखें। पेन का कवर हटाएं, निब से लिफ्ट आने का बटन पुश करें और पेन को कवर से बंद कर दें। घुसने से पहले फैन ऑन कर दें, थोड़ा वेट करें फिर घुसें। फ्लोर सिलेक्ट करने के लिए फिर से पेन का इस्तेमाल करें। अगर कोई और भी लिफ्ट में है तो दीवार की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं। दूसरों के मुंह से दूर रहें। घर या लिफ्ट का दरवाजा खोलने और बंद करने के लिए कुहनी, पैर या पीठ का इस्तेमाल करें।

  • ​मॉल/मार्केट

    कम से कम जाएं। कोशिश करें कि हफ्ते में एक ही बार बाजार जाना पड़े। कपड़े ऐसे पहनें जिनसे पूरा शरीर कवर हो जाए। अपनी आंखें, नाक, मुंह आदि को हाथों से न छुएं। हर सामने वाले को कोरोना मरीज समझें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शॉपिंग करें। बाजार में कैश के लेन-देन से बचें। डिजिटल पेमंट की आदत डालें यानी क्रेडिट-डेबिट कार्ड, भीम ऐप, पेटीएम आदि का उपयोग करें। दुकान या शोरूम में यहां-वहां छूने की आदत से बाज आएं। काउंटर पर कुहनी या हाथ लगाकर दुकानदार से बात करने की आदत है तो भूल जाएं। मार्केट से आने पर दरवाजा कभी भी हाथ से न खोलें। हथेली या कोहनी का इस्तेमाल करें।

‘कोरोना से मौतों की दर 5% से कम रखना जरूरी’

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने कहा कि कोविड-19 के फैलने की रफ्तार में कमी नहीं आई है और इसका प्रभाव अगले दो-तीन सालों तक के लिए बंट गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस जानलेवा बीमारी से मौतों के रेट को 5% से कम रखना जरूरी होगा। अगर रोजाना मौतों की संख्या 1,000-2,000 पहुंच जाएगी तो सरकार के लिए यह खतरनाक संकेत होगा।



पैनल ने दिए सरकार को 3 सुझाव


ICMR ने पाया कि कोरोना के खिलाफ ट्रैक, ट्रेस और ट्रीट की मौजूदा रणनीति महाराष्ट्र और गुजरात में ठीक काम कर रही है। पिछले महीने हुई पैनल की बैठक ने 3 सुझाव दिए हैं। वेरी शॉर्ट, शॉर्ट और मीडियम टर्म के कदम।

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वेरी शॉर्ट टर्म कदम के तहत इस बीमारी से निपटने के लिए रैपिड टेस्टिंग, सर्विलांस, कंटेनमेंट, किफायती दवाओं की उपलब्धता, रूरल मोबाइल हेल्थ यूनिट्स और वेंटीलेटर, पीपीई किट्स, मास्क, ऑक्सीजन सप्लाई की उपलब्धता बनाए रखने के सुझाव दिए गए हैं ताकि कोविड-19 के मरीजों का बेहतर इलाज किया जा सके।

कोरोना मामलों में चीन से आगे निकला महाराष्ट्र

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  • अप्रैल में ही UK, US से आगे था भारत

    अप्रैल के पहले हफ्ते से ही भारत का ग्रोथ रेट लगातार अमेरिका और ब्रिटेन से ज्‍यादा रहा है। मई के बीच में रूस भी पीछे छूट गया और अब भारत में तेजी से कोरोना केस बढ़ रहे हैं।

  • भारत में सबसे तेजी से बढ़ रहा कोरोना!

    यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल और जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी का डेटा दिखाता है कि भारत का ग्रोथ रेट कोरोना से सबसे ज्‍यादा प्रभावित 5 देशों के बीच सबसे ज्‍यादा है। हालांकि ब्राजील का कोविड-19 डेटा कितना सही है, यह बता पाना मुश्किल है। क्‍योंकि वहां की हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री ने अपनी वेबसाइट से पिछले दिनों का डेटा हटवा दिया है। अब सिर्फ 24 घंटे का डेटा रखते हैं।

  • टेस्टिंग कम फिर भी ग्रोथ रेट ज्‍यादा

    टेस्टिंग के आंकड़े देखने पर पता चलता है कि भारत, ब्राजील और बाकी तीन देशों में जमीन आसमान का अंसर है। प्रति 1,000 आबादी पर टेस्ट की संख्‍या देखें तो भारत सिर्फ 3 से थोड़ा ज्‍यादा लोगों का ही टेस्‍ट कर पा रहा है। रूस डेली 3 लाख टेस्‍ट कर रहा है।

  • अभी तय करना है लंबा सफर

    इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) डेटा के मुताबिक, भारत में अब करीब 1.4 लाख टेस्‍ट रोज हो रही है। हालांकि यह स्थिति अप्रैल के मुकाबले कहीं बेहतर है। टेस्टिंग बढ़ाने से हालात शायद और अच्‍छे से मैनेज हो पाते।

शॉर्ट टर्म के तहत हेल्थ सेक्टर में इस महामारी को फैलने के प्लान को तैयार रखने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा कोरोना की वैक्सीन को तैयार करने के लिए वित्तीय मदद की भी बात कही गई है। पैनल ने स्वास्थ्य सेवा में ज्यादा निवेश करने की भी सलाह दी है। जिसमें हेल्थ वर्करों की कमी, देश की बची हुई 60 फीसदी आबादी को आयुष्मान भारत स्कीम में शामिल करने के संभावनाओं पर विचार करना और अखिल भारतीय सिविल सर्विस सेवा की तरह अखिल भारतीय मेडिकल सेवा बनाने का भी सुझाव दिया गया है।

भारत में कोरोना का पीक आना बाकी

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