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Delhi Earthquake: दिल्‍ली में फिर आया भूकंप, पिछले दो महीने में 14वीं बार लगे झटके

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Delhi earthquake news today: दिल्‍ली-एनसीआर में पिछले दो महीने के भीतर 14वीं बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। बार-बार ऐसा होना किसी बड़े भूकंप का संकेत है।

Edited By Deepak Verma | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

दिल्ली-NCR में बड़े भूकंप का खतरा?
हाइलाइट्स

  • भूकंप के झटकों से फिर कांपी दिल्‍ली, इस बार 2.1 रही तीव्रता
  • दिल्‍ली में पिछले दो महीनों के भीतर 14वीं बार लगे झटके, मन में बैठा डर
  • एक्‍सपर्ट्स दे रहे हैं बड़ा भूकंप आने की चेतावनी, खतरनाक है ये इलाका
  • जोन-4 में पड़ती है दिल्‍ली, भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील

नई दिल्‍ली

देश की राजधानी में सोमवार दोपहर फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। दिल्‍ली पिछले दो महीने से लगातार हल्‍के झटकों का शिकार हो रही है। इससे लोगों में पैनिक फैल रहा है। सोमवार दोपहर 2.1 तीव्रता का भूकंप आया जिसका केंद्र हरियाणा के गुरुग्राम में बताया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटकों की शुरुआत 12 अप्रैल (3.5 तीव्रता) से हुई। तब से अबतक अलग-अलग दिन 14 बार झटके लग चुके हैं। एक्‍सपर्ट्स कहते हैं कि इन्‍हें हल्‍के में नहीं लिया जाना चाहिए। ये किसी बड़े भूकंप का संकेत हो सकते हैं।

गुरुग्राम में था भूकंप का केंद्र

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र दिल्‍ली से सटे गुरुग्राम के पश्चिम में जमीन से 18 किलोमीटर गहराई में था। दोपहर 1 बजे दिल्‍ली-एनसीआर में झटके महसूस किए गए। इससे पहले आए झटकों का केंद्र कभी दिल्‍ली, कभी फरीदाबाद, रोहतक रहा है।

क्या अनहोनी के संकेत हैं भूंकप के ये झटके!

दिल्‍ली में कब-कब लगे झटके?


तारीख तीव्रता केंद्र
12 अप्रैल 3.5 दिल्‍ली
13 अप्रैल 2.7 दिल्‍ली
16 अप्रैल 2 दिल्‍ली
3 मई 3 दिल्‍ली
6 मई 2.3 फरीदाबाद
10 मई 3.4 दिल्‍ली
15 मई 2.2 दिल्‍ली
28 मई 2.5 फरीदाबाद
29 मई 4.5 और 2.9 रोहतक
1 जून 1.8 और 3 रोहतक
3 जून 3.2 फरीदाबाद
8 जून 2.1 गुरुग्राम

दिल्‍ली में क्‍या होने वाला है?

NBT

वैज्ञानिक दे रहे बड़े भूकंप की चेतावनी

इइंडियन इं‍स्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (IIT) के अलग-अलग एक्‍सपर्ट्स दिल्‍ली-एनसीआर में बड़ा भूकंप आने की चेतावनी दे चुके हैं। जानकार मानते हैं कि हल्‍के झटकों को चेतावनी की तरह देखा जाना चाहिए। IIT धनबाद के डिपार्टमेंट्स ऑफ अप्‍लाइड जियोफिजिक्‍स और सीस्‍मोलॉजी के मुताबिक, दिल्‍ली और एनसीआर में हाई इन्‍टेंसिटी का भूकंप आ सकता है। IIT कानपुर के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली-हरिद्वार रिज में खिंचाव के कारण आए दिन धरती हिल रही है। इस वजह से झटकों का दौर जारी रहेगा। नैशनल सेंटर ऑफ सीस्‍मोलॉजी (NCS) के पूर्व हेड एके शुक्ला कहते हैं कि छोटे भूंकप को चेतावनी के रूप में जरूर देखा जा सकता है।

जोन 4 में आती है दिल्‍ली, भूकंप का खतरा हमेशा

भूकंप के लिहाज से, भारत को चार अलग-अलग जोन में डिवाइड किया गया है। हाई इन्‍टेंसिटी जोन V से लो इन्‍टेंसिटी जोन II तक। दिल्ली-एनसीआर जोन IV में आता है, जिसे ‘गंभीर’ माना जाता है। राजधानी दिल्ली देश में सबसे अधिक भूकंप अनुभव करने वाले शहरों में से एक है। हिमालय पर्वत श्रृंखला से लगभग 280 से 350 किमी की दूरी पर स्थित दिल्ली हिमालय के सक्रिय मुख्य सीमा थ्रस्ट (MBT) से दूर नहीं है, जो कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक जाती है।

130 साल में आए सात बड़े भूकंप

  • 130 साल में आए सात बड़े भूकंप

    IIT कानपुर में सिविल इंजिनियरिंग विभाग के प्रफेसर जावेद एन मलिक के अनुसार, उनके इस दावे का आधार यह है कि पिछले 500 साल में गंगा के मैदानी क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। उत्‍तराखंड के रामनगर में चल रही खुदाई में 1505 और 1803 में भूकंप के अवशेष मिले हैं। उन्‍होंने बताया कि 1885 से 2015 के बीच देश में सात बड़े भूकंप दर्ज किए गए हैं। इनमें तीन भूकंपों की तीव्रता 7.5 से 8.5 के बीच थी।

  • भारी तबाही मचा सकता है बड़ा भूकंप

    वाडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के चीफ डॉ कलाचंद जैन ने चेतावनी दी है कि NCR क्षेत्र में लगातार सीस्मिक ऐक्टिविटी हो रही है और इससे दिल्‍ली में एक बड़ा भूकंप आ सकता है। IIT जम्‍मू के प्रोफेसर चंदन घोष ने कहा कि अगर कोई बड़ा भूकंप इस इलाके में आया तो भयानक नतीजे होंगे।

  • भूकंप आया तो करीब 400 किलोमीटर का इलाका होगा प्रभावित

    किसी भी बड़े भूकंप का 300-400 किलोमीटर की रेंज तक दिखता है। 2001 में भुज में आए भूकंप ने करीब 300 किमी दूर अहमदाबाद में भी बड़े पैमाने पर तबाई मचाई थी। इसके अलावा, भूकंप की कम तीव्रता की तरंगें दूर तक असर कर बिल्डिंगों में कंपन पैदा कर देती हैं। गंगा के मैदानी क्षेत्रों की मुलायम मिट्टी इस कंपन के चलते धसक जाती है।

  • भूकंप न कर पाए नुकसान, सावधानी के लिए बना ऐटलस

    केंद्र सरकार के आदेश पर डिजिटल ऐक्टिव फॉल्ट मैप ऐटलस तैयार किया गया है। इसमें ऐक्टिव फॉल्टलाइन की पहचान के अलावा पुराने भूकंपों का रेकॉर्ड भी तैयार हुआ है। ऐटलस से लोगों को पता चलेगा कि वे भूकंप की फॉल्ट लाइन के कितना करीब हैं और नए निर्माण में सावधानियां बरती जाएंगी।

  • ऐटलस तैयार करते वक्‍त मिली नई जानकारी

    ऐटलस को तैयार करने के दौरान टीम ने उत्तराखंड के रामनगर में जमीन में गहरे गड्ढे खोदकर रिसर्च शुरू किया। जिम कॉर्बेट नैशनल पार्क से 5-6 किमी की रेंज में हुए इस अध्ययन में 1505 और 1803 में आए भूकंप के सबूत मिले। रामनगर जिस फॉल्ट लाइन पर बसा है, उसे कालाडुंगी फॉल्टलाइन नाम दिया गया है। प्रफेसर जावेद के अनुसार, 1803 का भूकंप छोटा था, लेकिन मुगलकाल के दौरान 1505 में आए भूकंप के बारे में कुछ तय नहीं हो सका है। जमीन की परतों की मदद से इसे निकटतम सीमा तक साबित करना बाकी है।

  • भूकंप से बदला था कोसी नदी का रूट

    सैटलाइट से मिली तस्वीरों के अध्ययन से यह भी पता चला है कि डबका नदी ने रामनगर में 4-5 बार अपना अपना ट्रैक बदला है। अगले किसी बड़े भूकंप में यह नदी कोसी में मिल जाएगी। बरेली की आंवला तहसील के अहिच्छत्र में 12वीं से लेकर 14वीं शताब्दी के बीच भूकंपों के अवशेष मिले हैं।

  • प्‍लेट्स की निगरानी के लिए GPS स्‍टेशन

    इंडियन और तिब्बती (यूरेशियन) प्लेटों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फॉल्टलाइनों के करीब 20 स्थायी जीपीएस स्टेशन लगाए गए हैं। भूकंप संभावित क्षेत्रों में सेस्मोमीटर भी लगाए जा सकते हैं।

भूकंप की लोकेशन।

भूकंप की लोकेशन।

Web Title delhi hit with low-intensity earthquake of magnitude 2.1 says national centre for seismology(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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