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‘राजधानी के अस्पतालों में बाहरियों का इलाज नहीं’, क्या अब अपने ही देशवासियों के लिए दूर हो जाएगी दिल्ली?

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दिल्ली सरकार की एक कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर देशभर से लोग इलाज कराने दिल्ली आने लगे तो तीन दिन में ही अस्पताल भर जाएँगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी के अस्पतालों में केवल दिल्ली के निवासियों को ही सुविधाएं दी जानी चाहिए।

Edited By Ankit Ojha | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

हाइलाइट्स

  • दिल्ली सरकार की एक कमिटी ने कहा है कि अगर राजधानी के अस्पतालों में बाहरियों को ऐडमिट किया गया तो अस्पताल भर जाएंगे
  • कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पतालों में केवल दिल्ली वासियों को ही सुविधाएं मिलनी चाहिए
  • मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं कि अगर बाहर से लोग इलाज कराने आते रहेंगे तो संकट पैदा हो जाएगा

नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में कोरोना मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें लोगों ने अस्पतालों में बेड न मिलने की बात कही। अब दिल्ली सरकार की एक कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी के अस्पतालों में केवल यहां के निवासियों को ही सुविधाएं दी जाएं नहीं तो तीन दिन के भीतर सभी अस्पताल भर जाएंगे। इस कमिटी में पांच डॉक्टरों को शामिल किया गया था। देश की राजधानी में देशभर से आकर लोग रहते हैं। लॉकडाउन के बाद भी बहुत सारे लोग अपने गृह राज्य वापस नहीं जा पाए हैं और बहुत सारे लोग परिवार के साथ किराए पर रहते हैं। अगर दिल्ली सरकार कमिटी की रिपोर्ट पर अमल करती है तो दिल्ली के लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।



देशवासियों के लिए दूभर हो जाएगी राजधानी?
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले ही कहा था कि देशभर से लोग इलाज करवाने के लिए दिल्ली आते हैं। कोरोना काल में अगर बाहर से लोग दिल्ली के अस्पताल में इलाज कराने के लिए आ गए तो दिल्ली वासियों को सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। इस बात को लेकर उन्होंने जनता से सुझाव भी मांगे थे। दिल्ली की सीमाओं को सात दिन के लिए सील कर दिया गया।

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दिल्ली में पहले ही लोगों को मिल गई थी छूट

लॉकडाउन चार में दिल्ली में काफी छूट दे दी गई थी। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि लॉकडाउन में राजधानी को ज्यादा दिन नहीं रखा जा सकता। उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली कोरोना से लड़ने के लिए तैयार है और राजधानी के अस्पतालों में पर्याप्त बेड हैं। हालांकि लॉकडाउन में ढील के बाद ही कोरोना संक्रमण के मामले रेकॉर्ड तोड़ने लगे। अब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसमें मरीजों को अस्पताल में एंट्री न दिए जाने की बात कही जा रही है।

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तीन दिन में 44 लोगों की मौत


कोरोना संक्रमण के मामले में देश छठे नंबर पर पहुंच गया है। वहीं देश में दिल्ली शहर का तीसरा नंबर है। 1 जून से 3 जून के बीच राजधानी में 44 कोरोना मरीजों ने दम तोड़ दिया। वहीं पिछले 10 दिनों में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। 27 मई को मौतों का आंकड़ा 303 था जो अब बढ़कर 708 हो गया है। शुक्रवार को दिल्ली में 1300 से ज्यादा संक्रमण के नए मामले आए।

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कम टेस्टिंग का भी आरोप

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने यह भी आरोप लगाया था कि टेस्टिंग लैब में दिल्ली सरकार पर्याप्त सैंपल नहीं भेज रही है। इसपर सीएम केजरीवाल ने सफाई देते हुए कहा कि कई लैब सही टेस्टिंग नहीं कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में देश के अन्य शहरों से ज्यादा टेस्टिंग हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पहले भी कह चुके हैं कि दिल्ली में ज्यादा छूट देने संकट खड़ा कर सकता है। हालांकि केजरीवाल यही कहते आए हैं कि छूट केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ही दी गई।



सर गंगाराम अस्पताल पर FIR


दिल्ली सरकार ने सर गंगाराम अस्पताल पर आईपीसी की धारा 154 के तहत केस दर्ज करा दिया है। आरोप है कि अस्पताल बेड की कालाबाजारी में लिप्त था। दिल्ली सरकार ने पहले भी क हा था कि अगर कोई अस्पताल बेड होते हुए किसी मरीज को ऐडमिट नहीं करेगा तो उसपर कार्रवाई की जाएगी। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि बिना किसी नोटिस के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Web Title delhi govt committee said health infrastructure should only be used for residents(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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